जन्म से नहीं सुन पाती थी 5 साल की परिक्रमा, चिरायु टीम और एम्स रायपुर ने लौटाई आवाजों की दुनिया

कॉकलियर इम्प्लांट के बाद सुनने लगी बच्ची, अब स्पीच थेरेपी के साथ स्कूल भी जा रही

जगदलपुर, 26 सितम्बर 2026। बस्तर के एक साधारण परवार की 5 वर्षीय मासूम परिक्रमा साहू के जीवन में चिरायु योजना और आधुनिक चिकित्सा ने नई उम्मीद जगाई है। जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ परिक्रमा अब आवाजें सुन और पहचान पा रही है। कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है और अब स्कूल भी जाने लगी है।

जगदलपुर के अघनपुर निवासी अनूप साहू की बेटी परिक्रमा जब करीब तीन साल की थी, तब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु टीम नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची थी। इस दौरान टीम की नजर एक ऐसी बच्ची पर पड़ी, जो एक कोने में शांत बैठी थी और आसपास की गतिविधियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी।

टीम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जानकारी ली तो पता चला कि बच्ची जन्म से ही न तो सुन पाती है और न ही बोल पाती है। इसके बाद चिरायु टीम ने बच्ची के माता-पिता से संपर्क कर उन्हें आगे की जांच और उपचार के बारे में जानकारी दी।

परिजनों को बच्ची की समस्या का समाधान संभव होने की जानकारी मिलने के बाद उसे महारानी जिला अस्पताल जगदलपुर स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई लाया गया। यहां आवश्यक बीईआरए जांच की गई। जांच के बाद विशेषज्ञ उपचार के लिए बच्ची को एम्स रायपुर रेफर किया गया।

एम्स रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच के बाद कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की सलाह दी गई। सर्जरी से पहले करीब एक वर्ष तक आवश्यक ऑडियो थेरेपी कराई गई, जिसे जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई जगदलपुर के माध्यम से पूरा कराया गया।

इसके बाद 1 अप्रैल 2024 को एम्स रायपुर में परिक्रमा की सफल कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद बच्ची सुनने में सक्षम हुई और उसके जीवन में आवाजों की दुनिया लौट आई।

वर्तमान में परिक्रमा को जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई के माध्यम से नियमित स्पीच थेरेपी दी जा रही है। अब वह स्कूल जाने लगी है और सामान्य बच्चों की तरह अपने आसपास की दुनिया को समझने और सीखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बेटी के जीवन में आए इस बदलाव से उसके माता-पिता और परिवार में खुशी का माहौल है।

कॉकलियर इम्प्लांट के बाद सुनने लगी बच्ची, अब स्पीच थेरेपी के साथ स्कूल भी जा रही

जगदलपुर, 26 सितम्बर 2026। बस्तर के एक साधारण परिवार की 5 वर्षीय मासूम परिक्रमा साहू के जीवन में चिरायु योजना और आधुनिक चिकित्सा ने नई उम्मीद जगाई है। जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ परिक्रमा अब आवाजें सुन और पहचान पा रही है। कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है और अब स्कूल भी जाने लगी है।

जगदलपुर के अघनपुर निवासी अनूप साहू की बेटी परिक्रमा जब करीब तीन साल की थी, तब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु टीम नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची थी। इस दौरान टीम की नजर एक ऐसी बच्ची पर पड़ी, जो एक कोने में शांत बैठी थी और आसपास की गतिविधियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी।

टीम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जानकारी ली तो पता चला कि बच्ची जन्म से ही न तो सुन पाती है और न ही बोल पाती है। इसके बाद चिरायु टीम ने बच्ची के माता-पिता से संपर्क कर उन्हें आगे की जांच और उपचार के बारे में जानकारी दी।

परिजनों को बच्ची की समस्या का समाधान संभव होने की जानकारी मिलने के बाद उसे महारानी जिला अस्पताल जगदलपुर स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई लाया गया। यहां आवश्यक बीईआरए जांच की गई। जांच के बाद विशेषज्ञ उपचार के लिए बच्ची को एम्स रायपुर रेफर किया गया।

एम्स रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच के बाद कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की सलाह दी गई। सर्जरी से पहले करीब एक वर्ष तक आवश्यक ऑडियो थेरेपी कराई गई, जिसे जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई जगदलपुर के माध्यम से पूरा कराया गया।

इसके बाद 1 अप्रैल 2024 को एम्स रायपुर में परिक्रमा की सफल कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद बच्ची सुनने में सक्षम हुई और उसके जीवन में आवाजों की दुनिया लौट आई।

वर्तमान में परिक्रमा को जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई के माध्यम से नियमित स्पीच थेरेपी दी जा रही है। अब वह स्कूल जाने लगी है और सामान्य बच्चों की तरह अपने आसपास की दुनिया को समझने और सीखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बेटी के जीवन में आए इस बदलाव से उसके माता-पिता और परिवार में खुशी का माहौल है।

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