13जून2026
टिहरी/जम्मू। उत्तराखंड के टिहरी जिले के रहने वाले अग्निवीर रोहित रावत की असामयिक मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। देश सेवा का सपना लेकर सेना में शामिल हुए रोहित ने इसी वर्ष जनवरी में अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी, लेकिन महज पांच महीने बाद उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा। शुक्रवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
जानकारी के अनुसार रोहित रावत जम्मू में तैनात थे। 10 जून को ड्यूटी के दौरान सर्विस राइफल से गोली लगने के कारण उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया। हर कोई यह जानकर स्तब्ध रह गया कि कुछ महीने पहले ही सेना की वर्दी पहनकर देश सेवा के लिए निकला युवा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
शुक्रवार सुबह जब रोहित का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। तिरंगे में लिपटे जवान को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी अर्पित की। इस दौरान मौजूद लोगों ने “भारत माता की जय” और “रोहित रावत अमर रहें” के नारों के साथ अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
रोहित रावत बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे। कठिन मेहनत और लगन के बाद उन्होंने सेना में स्थान हासिल किया था। परिवार और गांव के लोगों को उन पर गर्व था। लेकिन उनकी अचानक हुई मौत ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि रोहित एक अनुशासित, मेहनती और मिलनसार युवक थे, जिनका सपना देश के लिए कुछ बड़ा करने का था।
अंतिम संस्कार के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सेना के अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और रोहित के बलिदान तथा देशभक्ति को नमन किया।
रोहित रावत भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी देशभक्ति, साहस और समर्पण की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। टिहरी का यह वीर सपूत हमेशा लोगों की यादों में जीवित रहेगा।