रायपुर 12सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कथित घोटाले की जांच अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पदस्थ अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है। अदालत ने उन्हें पूछताछ के लिए 6 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया है।
जांच में WhatsApp बातचीत की एंट्री
ED की कार्रवाई में आरोपी और चेतन बोरघरिया के बीच हुई बताई जा रही WhatsApp बातचीत को अहम माना जा रहा है। जांच एजेंसी इन संदेशों के जरिए भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित संपर्कों, लेनदेन और पेपर उपलब्ध कराने के आरोपों की पड़ताल कर रही है।
बोरघरिया 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में भी काम कर चुके हैं। यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद CGPSC मामले की जांच को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
परीक्षा से पहले पेपर पहुंचने का आरोप
जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि एक महिला अभ्यर्थी को प्रारंभिक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। जांच एजेंसी इस दावे की भी पड़ताल कर रही है कि उपलब्ध कराया गया पेपर परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से पूरी तरह मेल खाता था।
इसके अलावा मुख्य परीक्षा के पेपर के बदले करीब 70 लाख रुपये के कथित लेनदेन की जानकारी भी जांच का हिस्सा है। ED अब इन पैसों के स्रोत और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका पता करने में जुटी है।
दो लोगों के बाद तीसरी बड़ी गिरफ्तारी
इस मामले में ED पहले ही CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार कर चुकी है। चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी अब इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों को भी तलाश रही है।
6 दिन की हिरासत में होगी पूछताछ
अदालत से मिली छह दिन की रिमांड के दौरान ED बोरघरिया से कथित WhatsApp बातचीत, परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों, आर्थिक लेनदेन और अन्य आरोपियों से संपर्क के संबंध में पूछताछ करेगी। फिलहाल जांच एजेंसी के आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुष्टि होना बाकी है।