तीन साल बाद घर लौटीं चार परिवारों की खुशियां, पुलवामा में फंसे 16 लोगों को पुलिस ने कराया मुक्त

जांजगीर-चांपा, 7 सितंबर 2026। रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर गए जांजगीर-चांपा क्षेत्र के चार परिवार करीब तीन साल बाद सकुशल अपने घर लौट आए। पुलवामा के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी कर रहे इन परिवारों ने मजदूरी नहीं मिलने और कथित तौर पर बंधक बनाकर काम कराने की शिकायत की थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद जांजगीर-चांपा पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से समन्वय कर 16 लोगों को सुरक्षित मुक्त कराया।

जानकारी के मुताबिक, बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के कपिस्दा गांव निवासी नरेश बंजारे, पवन बंजारे और मधु खडेल तथा सक्ती जिले के बाराद्वार निवासी संतोष टंडन करीब तीन वर्ष पहले रोजगार की तलाश में एक व्यक्ति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। वहां उन्हें पुलवामा क्षेत्र के ईंट भट्ठे में काम मिला।

पीड़ितों के अनुसार, काम कराने के बावजूद उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था। आरोप है कि उन्हें वहां से जाने नहीं दिया जाता था और दबाव बनाकर काम कराया जा रहा था। इसी दौरान नरेश बंजारे ने किसी तरह फोन के जरिए अपने परिचित जवाहर टंडन को पूरी स्थिति की जानकारी दी।

मामला सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों के माध्यम से जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय तक पहुंचा। एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई के लिए समन्वय शुरू कराया। इसके बाद चारों परिवारों के कुल 16 सदस्यों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पुलिस ने दिखाई मानवीय संवेदना

मुक्त कराए गए श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों की वापसी की व्यवस्था जांजगीर-चांपा पुलिस ने अपने खर्चे पर की। सभी को ट्रेन के माध्यम से जांजगीर लाया गया। यहां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैंडन यार्क ने परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके बाद पुलिस बस से सभी को उनके गृहग्राम रवाना किया गया।

तीन साल बाद जब परिवार अपने घर पहुंचे तो परिजनों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ नजर आई। लंबे समय से अपनों की वापसी का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक रहा।

पुलिस की इस पहल ने यह भी दिखाया कि संकट में फंसे श्रमिकों की मदद और उनकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने में पुलिस प्रशासन किस तरह सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

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