रायपुर, 24 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में राजस्व न्यायालयों में लंबित भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आई है। राज्यभर में दर्ज 4 लाख 67 हजार 415 प्रकरणों में से 3 लाख 80 हजार 224 मामलों का निराकरण किया जा चुका है। इस तरह कुल मामलों के निपटारे की दर 81.35 प्रतिशत पहुंच गई है। वहीं, 87 हजार 191 प्रकरण अभी लंबित हैं, जिनके निपटारे के लिए समयबद्ध तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं।
राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण का सीधा संबंध आम लोगों की जमीन, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे महत्वपूर्ण मामलों से है। मामलों के जल्द निपटने से लोगों को लंबे समय तक राजस्व कार्यालयों और अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
सुकमा, नारायणपुर और दंतेवाड़ा में 90% से ज्यादा मामलों का निपटारा
दूरस्थ और आदिवासी बहुल जिलों में भी राजस्व प्रकरणों के निपटारे में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सुकमा में 92.70 प्रतिशत मामलों का निराकरण हुआ है। यहां 7,224 में से 6,697 प्रकरणों का निपटारा किया गया। नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण हुआ है। बीजापुर में भी 89.67 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
वहीं, बड़े जिलों में भी बड़ी संख्या में राजस्व प्रकरणों का निराकरण हुआ है। बस्तर में 17,600 में से 15,745, बलौदाबाजार-भाटापारा में 20,905 में से 18,494, रायपुर में 34,226 में से 29,824 और बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 प्रकरणों का निपटारा किया गया है।
पुराने लंबित मामलों पर भी फोकस
लंबित 87,191 मामलों को उनकी अवधि के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें 0 से 6 महीने पुराने 51,401, 6 महीने से 1 साल के 13,218, 1 से 3 साल के 15,918, 3 से 5 साल के 3,903 और 5 साल से अधिक पुराने 2,751 मामले शामिल हैं। पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
1,027 गांवों के सर्वे का भी काम
राज्य में भू-अभिलेखों को मजबूत करने के लिए ‘ई-धरती’ योजना और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों समेत कुल 1,027 गांवों को सर्वे के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें से 284 गांवों का सर्वे पूरा कर डाटा ‘भुइयां पोर्टल’ पर अपलोड किया जा चुका है।
अबूझमाड़ और नारायणपुर क्षेत्र में भी सर्वेक्षण का काम आगे बढ़ाया गया है। 6 गांवों का अंतिम प्रकाशन पूरा कर उनके अभिलेख और नक्शे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए हैं, जबकि 59 अन्य गांवों में अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया जारी है।
राज्य सरकार के अनुसार, डिजिटल गवर्नेंस, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक, डिजिटल ट्रैकिंग और नियमित समीक्षा के माध्यम से राजस्व प्रकरणों के निपटारे की प्रक्रिया को और तेज करने का प्रयास किया जा रहा है।