जगदलपुर 24सितबंर 2026/झीरम घाटी हत्याकांड मामले में जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत द्वारा 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने दोषियों के परिजनों से चर्चा के बाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है। अब मामले में हाईकोर्ट की ओर से आगे की कार्रवाई और नोटिस का इंतजार है।
13 साल बाद आया था फैसला
झीरम घाटी मामले में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष एनआईए अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा पर सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई। अदालत ने बाद में सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। एनआईए ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
इन 10 दोषियों को मिली है सजा
मृत्युदंड पाने वालों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। सभी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद हैं।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला हुआ था। सुकमा जिले के दरभा क्षेत्र में हुए इस हमले में 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत सुरक्षा बलों के जवान और अन्य लोग भी मारे गए थे।
मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और विधायक योगेंद्र शर्मा समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे। विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में 11 जून 2013 को उनका निधन हुआ था।
अब मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।