जयपुर/प्रतापगढ़ 24सितंबर 2026/राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी में अवैध खनन रोकने के दौरान फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत की डंपर की चपेट में आने से हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 6 अक्टूबर तक पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी 6 अक्टूबर को होगी।
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने प्रतापगढ़ की घटना का उल्लेख किया, जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को अगली सुनवाई में मामले से जुड़ी पूरी जानकारी और कार्रवाई रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने को कहा।
अवैध खनन रोकने पहुंचे थे रेंजर
घटना 21 सितंबर की देर रात छोटीसादड़ी क्षेत्र के सुकड़ गांव की बताई जा रही है। वन विभाग की टीम को इलाके में अवैध मिट्टी खनन की सूचना मिली थी। रेंजर प्रताप सिंह चूंडावत वनरक्षक सुरेश मेघवाल सहित टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि मिट्टी से भरे डंपर को रोकने के प्रयास के दौरान चालक ने रेंजर की बाइक को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल रेंजर को निंबाहेड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने मौके से दो डंपर, एक जेसीबी और एक ट्रैक्टर जब्त किया है। वाहन मालिकों और चालकों से पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य डंपर चालक की तलाश जारी है।
वनकर्मियों ने उठाई ‘वन शहीद’ का दर्जा देने की मांग
रेंजर की मौत के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश है। क्षेत्रीय वन अधिकारी संघ और राजस्थान अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ की ओर से धरना देकर प्रताप सिंह चूंडावत को ‘वन शहीद’ का दर्जा देने, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, सख्त कानूनी कार्रवाई और उनकी स्मृति में शहीद स्मारक बनाने की मांग की गई।
वन विभाग की ओर से बताया गया कि रेंजर को वन शहीद का दर्जा देने और स्मारक बनाने के प्रस्ताव मुख्य वन संरक्षक, उदयपुर को भेजे गए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम विदाई के दौरान दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर, शहीद का दर्जा दिए जाने से अलग प्रक्रिया है।
आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की भी मांग
उपवन संरक्षक सुरेश अग्रवाल ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर घटना में शामिल आरोपियों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की मांग की है। वन विभाग की ओर से वन अपराध का प्रकरण भी दर्ज किया गया है।
प्रताप सिंह चूंडावत करीब दो साल से छोटीसादड़ी में पदस्थ थे। वन विभाग के अनुसार वे वन्यजीव संरक्षण और अजगर, तेंदुए सहित जहरीले सांपों के रेस्क्यू कार्य में भी सक्रिय रहे थे। उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका था।