बरेली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा दिए गए इस्तीफे को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस मामले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुलकर उनका समर्थन किया है। एक मीडिया इंटरव्यू में शंकराचार्य ने कहा कि यह इस्तीफा किसी संतोष या स्वेच्छा से नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक पीड़ा और आत्मिक आघात के चलते दिया गया निर्णय है।
शंकराचार्य का कहना है कि जिस वेदना से गुजरकर अलंकार अग्निहोत्री ने यह फैसला लिया, वही पीड़ा आज देश के असंख्य सनातन अनुयायियों के भीतर भी मौजूद है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में समाज के कमजोर वर्गों के साथ-साथ धार्मिक जीवन जीने वालों को भी लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि हालिया घटनाओं में शंकराचार्य परंपरा और उनके अनुयायियों के साथ जो व्यवहार हुआ, वह लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने UGC अधिनियम को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह प्रावधान हिंदू समाज के भीतर वैचारिक विभाजन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने सरकार से इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने संगम क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों, शंकराचार्यों की गरिमा और सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। शंकराचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आस्था और परंपरा से जुड़े प्रतीकों का अनादर होता रहा, तो इसके गंभीर राजनीतिक और सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
अलंकार अग्निहोत्री के संदर्भ में शंकराचार्य ने कहा कि आज के दौर में जब बहुत से लोग परिस्थितियों के आगे मौन हैं, ऐसे समय में उनका कदम आत्मसम्मान और वैचारिक दृढ़ता का परिचायक है
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा बयान, बोले— ‘आहत आत्मा की आवाज़ है यह कदम