गोद में 9 महीने की बेटी, सामने नदी और 3 किमी का पथरीला रास्ता; बच्चों को पढ़ाने रोज स्कूल पहुंचती हैं शिक्षिकाएं

बलरामपुर 19सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव से दो महिला शिक्षिकाओं की कर्तव्यनिष्ठा की तस्वीर सामने आई है। मानसून के दौरान जब गांव तक पहुंचना चुनौती बन जाता है, तब भी दोनों शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ाने के लिए रोज मुश्किल रास्ता तय कर स्कूल पहुंच रही हैं।

धौरपुर गांव तक पहुंचने के लिए मानसून के समय मोरन और इरइया नदियों के संगम को पार करना पड़ता है। इसके बाद शिक्षिकाओं को करीब 3 किलोमीटर का पथरीला रास्ता तय करना होता है। मुश्किलें तब और बढ़ जाती हैं, जब नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ हो।

बताया जा रहा है कि दोनों शिक्षिकाएं इन परिस्थितियों के बावजूद स्कूल पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखती हैं। इनमें से एक शिक्षिका अपनी 9 महीने की बेटी को गोद में लेकर नदी पार करती हैं। उनकी यह तस्वीर शिक्षा के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी को दर्शाती है।

शिक्षिकाओं का समर्पण सराहनीय, सुविधाओं की भी जरूरत

दुर्गम इलाके में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षिकाओं का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। वहीं, ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है। मानसून के दौरान नदी पार कर स्कूल पहुंचने जैसी स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रास्ते, पुल या अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जरूरत सामने आती है।

ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा को सुचारु बनाए रखने के लिए शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा और आवागमन की सुविधा पर भी सरकार और प्रशासन को ध्यान देना होगा।

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