जगदलपुर, 17 सितंबर 2026। बस्तर के दरभा विकासखंड के ग्राम रामपाल छिन्दावाड़ा निवासी किसान सुदर्शन बघेल ने सरकारी योजना और आधुनिक तकनीक का लाभ लेकर अपनी पारंपरिक आजीविका को नए व्यवसाय में बदल दिया। कभी सीमित संसाधनों के चलते पारंपरिक खेती और छोटी डबरी में मछली पालन तक सीमित रहने वाले सुदर्शन अब व्यावसायिक स्तर पर मछली उत्पादन कर रहे हैं।
सुदर्शन पहले खेती के साथ छोटी धान मिल चलाते थे और अपनी डबरी में पारंपरिक तरीके से मछली पालन करते थे। इससे होने वाली आय सीमित थी। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत सवा एकड़ क्षेत्र में तालाब निर्माण और इनपुट सहायता का लाभ लिया।
अनुसूचित जनजाति वर्ग के सुदर्शन को करीब 5.50 लाख रुपये की स्वीकृत लागत पर 60 प्रतिशत अनुदान मिला। आर्थिक सहायता के साथ विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए उन्होंने तालाब में मिश्रित प्रजातियों की मछलियों का पालन शुरू किया।
मछली पालन में वैज्ञानिक तरीके अपनाने से उत्पादन और मछलियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ। सुदर्शन ने तैयार मछलियों को बिचौलियों के बजाय गांव और आसपास के बाजारों में सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिली और करीब डेढ़ लाख रुपये की प्रत्यक्ष विक्रय आय अर्जित हुई।
सुदर्शन बघेल की यह पहल बताती है कि उपलब्ध संसाधनों के साथ सही तकनीक, बाजार की समझ और शासकीय योजनाओं का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। आज उनका मछली पालन दूसरे किसानों के लिए भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उदाहरण बन रहा है।