दंतेवाड़ा 15सितम्बर 2026/बस्तर की पहचान सिर्फ घने जंगलों और खूबसूरत वादियों तक सीमित नहीं है। यहां कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जो अपनी अनोखी कहानी के कारण लोगों को आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से एक है दंतेवाड़ा की बैलाडीला पहाड़ियों में करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ढोलकल गणेश। जंगल और पहाड़ों के बीच खुले आसमान के नीचे विराजे भगवान गणेश के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
ढोलकल की यात्रा अपने आप में किसी रोमांच से कम नहीं है। पहाड़ी रास्तों और जंगलों के बीच से होकर श्रद्धालुओं को गणपति तक पहुंचना पड़ता है। मंजिल पर पहुंचने के बाद प्राकृतिक वातावरण के बीच विराजमान प्राचीन गणेश प्रतिमा का दर्शन इस कठिन सफर को यादगार बना देता है।
एक दांत से जुड़ी है पौराणिक कथा
ढोलकल गणेश की सबसे खास बात उनकी प्रतिमा का स्वरूप है। भगवान गणेश यहां एकदंत रूप में दिखाई देते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान गणेश और परशुराम के बीच इसी क्षेत्र में युद्ध हुआ था। इस दौरान परशुराम के फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दांत टूट गया था। इसी लोककथा के कारण यहां विराजे गणपति को एकदंत गणेश के रूप में विशेष श्रद्धा से पूजा जाता है।
स्थानीय मान्यताओं में फरसपाल क्षेत्र के नाम को भी इसी कथा से जोड़ा जाता है। हालांकि यह कथा धार्मिक और लोकविश्वास का हिस्सा है, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही इस मान्यता ने ढोलकल को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान में खास स्थान दिया है।
सदियों पुरानी है प्रतिमा
ढोलकल गणेश की प्रतिमा को करीब 11वीं शताब्दी का माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण छिंदक नागवंशी शासनकाल के दौरान हुआ होगा। एक ही पत्थर से बनी यह प्रतिमा प्राचीन शिल्पकला की खूबसूरत मिसाल मानी जाती है।
प्रतिमा में गणेश जी के हाथों में फरसा, टूटा हुआ दंत, मोदक और अभय मुद्रा दिखाई देती है। गले में अक्षमाला और पहाड़ की चोटी पर प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थापित यह प्रतिमा ढोलकल को बाकी गणेश स्थलों से अलग पहचान देती है।
पहाड़ से नीचे गिरा दी गई थी प्रतिमा
ढोलकल गणेश की प्रतिमा को एक समय असामाजिक तत्वों ने नुकसान पहुंचाया था। प्रतिमा को पहाड़ी से नीचे गिरा दिया गया, जिसके बाद उसके कई हिस्से अलग-अलग जगहों पर बिखर गए थे। प्रशासन और पुरातत्व विभाग की मदद से प्रतिमा के हिस्सों को तलाशकर दोबारा एकत्र किया गया और विधिवत स्थापना की गई। इसके बाद स्थल की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया।
आस्था के साथ बढ़ रहा पर्यटन
समय के साथ ढोलकल गणेश धार्मिक स्थल के साथ-साथ बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी शामिल होता जा रहा है। पहाड़ी चढ़ाई, जंगल का रास्ता और आसपास का प्राकृतिक नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। स्थानीय स्तर पर गाइड और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होने से बाहर से आने वाले लोगों के लिए यात्रा पहले की तुलना में आसान हुई है।
ढोलकल आने वाले कई श्रद्धालु इसके बाद बारसूर के ऐतिहासिक गणेश मंदिर का रुख करते हैं। इससे दंतेवाड़ा और बारसूर को जोड़कर एक खास धार्मिक-पर्यटन यात्रा का अनुभव भी लोगों को मिलता है।
फरसपाल से शुरू होता है सफर
दंतेवाड़ा से करीब 15 किलोमीटर दूर फरसपाल गांव से ढोलकल की ओर जाने का रास्ता शुरू होता है। आगे का सफर पहाड़ी और जंगल वाले रास्ते से होकर गुजरता है। पहली बार आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय गाइड और सहयोग लेना उपयोगी माना जाता है।
बस्तर की पहाड़ियों में प्राकृतिक खूबसूरती के बीच विराजे ढोलकल गणेश आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां पहुंचने वालों की संख्या और बढ़ जाती है। भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा, उससे जुड़ी लोककथा और रोमांचक पहाड़ी सफर—इन तीनों का अनोखा मेल ढोलकल को बस्तर के खास स्थलों में शामिल करता है।