रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ, 23 सितम्बर तक देश-प्रदेश के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
रायपुर, 15 सितम्बर 2026। रायगढ़ की समृद्ध कला और सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने महाराजा चक्रधर सिंह के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। 14 से 23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में चलने वाले इस समारोह में देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी।
राज्यपाल ने कहा कि चक्रधर समारोह महज सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और उनकी समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया और कलाकारों को संरक्षण देकर संगीत, नृत्य और साहित्य को जनजीवन से जोड़ा। उनके प्रयासों से रायगढ़ घराने के कथक को देश ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।
उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाओं ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ को भारतीय कला और साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। कला और संस्कृति हमारी पहचान होने के साथ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम भी हैं।
समारोह के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान भी किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले, पद्मश्री अनुज शर्मा सहित अन्य कलाकारों और कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
वहीं राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण एवं प्रकाशन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस विषय को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी रखा गया है और प्रधानमंत्री ने इसमें विशेष रुचि दिखाई है।
समारोह की पहली शाम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों की प्रस्तुति ने रामलीला मैदान के माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद गायन, पखावज, तबला, बांसुरी और वायलिन की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों का दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
चक्रधर समारोह में 23 सितम्बर तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। आयोजन को रायगढ़ की कला और संस्कृति की गौरवशाली पहचान को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।