जगदलपुर, 14 अक्टूबर 2026। बस्तर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व में सदियों पुरानी परंपराओं का सिलसिला आगे बढ़ रहा है। मंगलवार रात से फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई। आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के छत्र को विशाल फूल रथ पर विराजित कर इस पारंपरिक विधान का शुभारंभ किया गया। रथ की परिक्रमा के साथ ही जगदलपुर में दशहरा उत्सव की रौनक और बढ़ गई है। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मुरिया दरबार में शामिल होने के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर बस्तरवासियों में उत्साह है।
मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ शुरू हुई परिक्रमा
बस्तर दशहरा की परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के तीसरे दिन और जोगी बिठाई के दूसरे दिन फूल रथ की परिक्रमा शुरू होती है। इसी क्रम में मंगलवार रात मां दंतेश्वरी के छत्र को फूल रथ पर विराजित कर विधि-विधान के साथ रस्म की शुरुआत की गई। इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने और रथ खींचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। फूल रथ की परिक्रमा का यह क्रम भीतर रैनी तक जारी रहेगा।
आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है फूल रथ
बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं सांसद महेश कश्यप ने फूल रथ की परिक्रमा को बस्तर की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों से चली आ रही इस परंपरा का आज भी श्रद्धा और निष्ठा के साथ निर्वहन किया जा रहा है। उन्होंने मां दंतेश्वरी और मावली माता से बस्तर दशहरा के निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना की और देशभर के लोगों से इस अनूठे सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने की अपील की।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित कार्यक्रम से बढ़ा उत्साह
इस वर्ष बस्तर दशहरा को लेकर लोगों में खास उत्सुकता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दशहरा के महत्वपूर्ण विधान मुरिया दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उनके संभावित आगमन को बस्तर के लिए गौरव का अवसर माना जा रहा है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में स्वागत और अभिनंदन की तैयारियों को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और जनभागीदारी के लिए देशभर में अलग पहचान रखता है। फूल रथ की परिक्रमा इसी सांस्कृतिक विरासत की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें आस्था के साथ बस्तर की सदियों पुरानी परंपराएं जीवंत होती हैं।