सुबह 6 से रात 9 बजे तक ई-रिक्शा चलाती हैं 20 साल की दीपाली, पिता का सहारा बन लिख रहीं आत्मनिर्भरता की कहानी

जगदलपुर, 14 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 20 वर्षीय दीपाली मानिकपुरी अपनी मेहनत और हौसले से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कालीपुर की रहने वाली दीपाली ई-रिक्शा चलाकर यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं और साथ ही अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी हाथ बंटा रही हैं। नवरात्रि के अवसर पर उनकी यह पहल नारी शक्ति और आत्मविश्वास की प्रेरक कहानी बनकर सामने आई है।

तीन बहनों में सबसे बड़ी दीपाली ने दसवीं तक पढ़ाई की है। उनके पिता कार चालक हैं। परिवार की परिस्थितियों को समझते हुए दीपाली ने कम उम्र में ही अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया। घर की जिम्मेदारियों में पिता का सहारा बनने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया और मेहनत को अपनी पहचान बना लिया।

दीपाली का दिन सुबह छह बजे शुरू हो जाता है। वे सुबह से रात नौ बजे तक ई-रिक्शा चलाकर यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा देती हैं। करीब 15 घंटे की दिनचर्या में वे लगातार मेहनत करती हैं और अपने काम के प्रति जिम्मेदारी निभाती हैं।

आमतौर पर पुरुषों के वर्चस्व वाले इस काम में दीपाली का आगे आना महिलाओं के प्रति बनी पारंपरिक सोच को भी चुनौती देता है। उनकी पहल बताती है कि आत्मनिर्भर बनने का संकल्प हो तो परिस्थितियां रास्ते की बाधा नहीं बनतीं।

नवरात्रि में मां दुर्गा की शक्ति की आराधना के बीच दीपाली की कहानी कर्म और साहस से नारी शक्ति का अर्थ समझाती है। वे न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत से दूसरी युवतियों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

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