सहारनपुर में नकली नोटों के बड़े मामले की जांच अब NIA के हाथों में, बैंक रिकॉर्ड से लेकर CCTV तक खंगाले जाएंगे; करोड़ों की रकम के मूवमेंट का पता लगाने की कोशिश
सहारनपुर: 9सितंबर 2026/पंजाब नेशनल बैंक की सहारनपुर करेंसी चेस्ट से जुड़े करोड़ों रुपये के नकली नोट मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। करीब 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों से जुड़े इस मामले में बैंक के तत्कालीन मैनेजर अमित की गिरफ्तारी के बाद अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिनसे इस पूरे मामले का नेटवर्क सामने आ सके।
स्थानीय पुलिस की ओर से अब तक जुटाए गए दस्तावेज और साक्ष्य NIA को सौंपे जा रहे हैं। इनमें केस डायरी के साथ आरोपों से जुड़े बयान, बरामदगी का रिकॉर्ड और जांच के दौरान सामने आए अन्य तथ्य शामिल हैं।
मैनेजर के बाद किन लोगों पर नजर?
मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों की नजर बैंक के भीतर की भूमिका पर भी है। मामले में तीन अन्य बैंक कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। अब जांच यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि करेंसी चेस्ट से जुड़े लेन-देन और नकदी की आवाजाही में किस-किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
इसके साथ ही संदिग्ध लोगों के बीच संपर्क और उनके वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।
बैंक खातों से खुलेगा नकदी का रास्ता
NIA के लिए सबसे अहम सुराग बैंकिंग रिकॉर्ड हो सकते हैं। बड़ी रकम की नकद निकासी वाले खातों को चिन्हित कर यह देखा जाएगा कि पैसा कब निकाला गया, किस प्रक्रिया के तहत निकला और उसके बाद उसका इस्तेमाल या ट्रांसफर किस तरह हुआ।
जांच में कैश विड्रॉल रिकॉर्ड, अकाउंट स्टेटमेंट, चेक और दूसरे बैंकिंग दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
CCTV फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा
करेंसी चेस्ट और बैंक शाखा से जुड़े CCTV फुटेज भी जांच के दायरे में रहेंगे। एजेंसी रिकॉर्ड में दर्ज नकदी की आवाजाही और CCTV में दिखाई देने वाली गतिविधियों के बीच मिलान कर सकती है।
इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि बड़ी रकम की निकासी के दौरान बैंक परिसर में कौन-कौन लोग मौजूद थे और नकदी किस प्रक्रिया से बाहर गई।
बड़े कारोबारियों के खातों की भी पड़ताल संभव
सहारनपुर के घंटाघर क्षेत्र स्थित सोफिया मार्केट में PNB की शाखा में कई कारोबारियों के खाते होने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसियां बड़े कैश ट्रांजैक्शन वाले खातों को भी जांच सकती हैं।
हालांकि, किसी खाते से बड़ी रकम निकलना अपने आप में अपराध या संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। किसी खाताधारक के खिलाफ कार्रवाई तभी संभव होगी, जब जांच में उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य सामने आएं।
NIA के सामने असली चुनौती नेटवर्क तक पहुंचने की
अब जांच का सवाल सिर्फ बैंक में नकली नोट मिलने तक सीमित नहीं है। NIA यह जानने की कोशिश करेगी कि नकली नोटों की सप्लाई या उनके इस्तेमाल के पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या नहीं।
आने वाले दिनों में केस डायरी और बैंकिंग रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल के बाद इस मामले में और नाम सामने आने की संभावना है। फिलहाल 17.29 करोड़ रुपये की नकदी का पूरा ट्रेल और करेंसी चेस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका जांच के केंद्र में है।