3000 किमी दूर अटैच किए गए CRPF कमांडेंट ने खोला मोर्चा, बोले- ‘यह ड्यूटी नहीं, खुली गिरफ्तारी जैसी स्थिति’; राष्ट्रपति से की शिकायत

चंदौली से डिब्रूगढ़ भेजे जाने पर उठाए सवाल, विजिलेंस DIG पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप; जांच में सबूत और गवाहों की सूची पर भी जताई आपत्ति

नई दिल्ली। 9सितंबर 2026/केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक कमांडेंट ने अपने ही विभाग के विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है। कमांडेंट पंकज पीटर शाह का आरोप है कि उन्हें उनकी मौजूदा तैनाती से करीब 3000 किलोमीटर दूर असम के डिब्रूगढ़ में जांच अधिकारी (IO) के कार्यालय से अटैच किया गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश बताते हुए ‘ओपन अरेस्ट’ यानी खुली गिरफ्तारी जैसी स्थिति करार दिया है।

कमांडेंट की ओर से भेजी गई शिकायत में विजिलेंस के DIG संजय कुमार सिंह पर अधिकारों के कथित दुरुपयोग और नियमों को दरकिनार कर कार्रवाई करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत की प्रतियां केंद्रीय गृह सचिव, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, CRPF महानिदेशक और नॉर्थ ईस्टर्न जोन के संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजे जाने की बात सामने आई है।

डिब्रूगढ़ में हर गतिविधि पर निगरानी का आरोप

शिकायत के मुताबिक, कमांडेंट को डिब्रूगढ़ में जांच अधिकारी के कार्यालय में लगातार मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। उनका आरोप है कि उनकी गतिविधियों को भी जांच अधिकारी की अनुमति से जोड़ दिया गया है।

कमांडेंट का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था उनकी नियमित सेवा जिम्मेदारियों से अलग है और इससे उनकी स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि CCS (CCA) Rules, 1965 अथवा CRPF से संबंधित नियमों में जांच पूरी कराने के लिए इस प्रकार के अटैचमेंट का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारी की स्थिति और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखे बिना इस तरह का आदेश कैसे जारी किया जा सकता है।

जांच की शुरुआत पर भी उठाए सवाल

कमांडेंट ने अपनी शिकायत में विभागीय जांच की प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उनके मुताबिक, 10 मार्च 2025 को आरोपों से संबंधित एक ज्ञापन जारी किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में अभियोजन साक्ष्यों और गवाहों का उल्लेख किया गया।

हालांकि, कमांडेंट का आरोप है कि सूची में शामिल कई साक्ष्य और कुछ गवाहों के बयान वास्तविक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि जांच में जिन दस्तावेजों और गवाहों का उल्लेख किया गया है, उनमें से बड़ी संख्या मौजूद ही नहीं है तो जांच की बुनियाद पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने इसे कथित तौर पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।

SRE फंड से जुड़ा बताया जा रहा मामला

सूत्रों के अनुसार, यह विवाद कथित तौर पर SRE फंड से जुड़े मामले से संबंधित है। कमांडेंट की ओर से यह दावा किया गया है कि संबंधित कार्य की प्रक्रिया में कई अधिकारी शामिल थे और राज्य स्तर पर ऑडिट के दौरान भी आपत्तियां दूर हो गई थीं।

उनका आरोप है कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अचानक उनसे पूछताछ शुरू की गई और बाद में तैयार किए गए सामान या कार्य में कमियां निकाली जाने लगीं।

कमांडेंट का यह भी कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, लेकिन कार्रवाई का मुख्य केंद्र उन्हें ही बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

‘करियर बर्बाद करने की कोशिश’

शिकायत में कमांडेंट ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ विभागीय जांच उचित अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत नहीं बल्कि कथित रूप से एक प्रभावशाली समूह के दबाव में शुरू की गई।

उनका दावा है कि उन्हें मानसिक दबाव में लाने और जांच में झुकने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से ही उन्हें इतनी दूर अटैच किया गया है।

उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की है कि मामले में हस्तक्षेप कर उनके मौलिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

अनुच्छेद 14 और 21 का दिया हवाला

कमांडेंट ने अपनी शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा प्रभावित की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार मानसिक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके मानवाधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं।

हाल ही में हुई बड़ी हार्ट सर्जरी का भी जिक्र

शिकायत में कमांडेंट ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी दिल की बड़ी सर्जरी हुई है और मौजूदा परिस्थितियों में वह अत्यधिक मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं।

उनका कहना है कि इस स्थिति में उनके लिए जांच प्रक्रिया में प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से मानवीय और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

CRPF के व्यापक माहौल पर भी जताई चिंता

कमांडेंट ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि CRPF पहले से ही जवानों के बीच आत्महत्या और आपसी हिंसा जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी कथित तौर पर इस तरह के मानसिक दबाव से गुजरना पड़े, तो इसका असर पूरे संगठन की कार्यसंस्कृति पर पड़ सकता है।

उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी परिस्थितियां बल के कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।

अब नजर विभागीय कार्रवाई पर

कमांडेंट की शिकायत सामने आने के बाद इस मामले में आगे की प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल कमांडेंट द्वारा लगाए गए आरोप उनकी शिकायत और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित विजिलेंस अधिकारी या CRPF प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ CRPF अधिकारी ने न केवल अपने अटैचमेंट और विभागीय जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मौलिक अधिकारों, प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल और जांच की निष्पक्षता जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *