नई दिल्ली9सितंबर 2026/सत्य निकेतन में PG की इमारत ढहने के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस ने अब PG चलाने वाले सुधांशु को गिरफ्तार किया है। ताजा गिरफ्तारी के बाद मामले में पकड़े गए लोगों की संख्या पांच हो गई है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर हादसे से जुड़े घटनाक्रम और कथित लापरवाही की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
हादसे से पहले निर्माण कार्य बना जांच का अहम बिंदु
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि हादसे के दिन इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था। बारिश के दौरान वहां जमा हुए मलबे और कचरे को हटाने के लिए फर्श की मरम्मत की जा रही थी। वहीं, इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर भी अतिरिक्त जगह तैयार करने के लिए काम कराया जा रहा था।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निर्माण और मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और इन गतिविधियों का इमारत की संरचना पर कोई असर पड़ा था या नहीं।
बिल्डिंग मालिक के परिवार पर भी कार्रवाई
मामले में संपत्ति के मालिक परिवार के तीन सदस्य भी पुलिस कार्रवाई की जद में हैं। 75 वर्षीय उर्मिला और उनके 81 वर्षीय पति हरिराम को अदालत में पेश किए जाने के बाद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस ने इससे पहले कासगंज से उस लेबर कॉन्ट्रैक्टर को पकड़ा था, जो हादसे वाली इमारत के बेसमेंट में कराए जा रहे काम से जुड़ा था।
MCD के अधिकारियों पर भी गिरी गाज
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने अपने स्तर पर भी कार्रवाई की है। साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। अधिकारियों की भूमिका और इलाके में अवैध अथवा असुरक्षित निर्माण की निगरानी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
आसपास की खतरनाक इमारतों की भी जांच
सत्य निकेतन की घटना के बाद प्रशासन ने आसपास की जर्जर इमारतों को लेकर भी सख्ती शुरू कर दी है। हादसे वाली बिल्डिंग के पास मौजूद एक असुरक्षित इमारत को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के मुताबिक, वहां रहने वाले छात्रों का सामान फायर सर्विस की मदद से सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा रहा है। लोगों से भी कार्रवाई के दौरान प्रशासन का सहयोग करने को कहा गया है।
सात लोगों की मौत के बाद उठे सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत में लड़कों के लिए PG संचालित किया जा रहा था। रविवार दोपहर इमारत अचानक ढह गई। हादसे में सात लोगों की जान चली गई।
इस घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के साथ यह भी देखना अहम होगा कि राजधानी में ऐसी इमारतों की निगरानी और सुरक्षा जांच का सिस्टम कितना प्रभावी है।