2सितम्बर 2026/
रायपुर/दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में कथित CGPSC भर्ती घोटाले और DMF घोटाले की जांच ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें CGPSC मामले से जुड़े उत्कर्ष चंद्राकर और DMF घोटाले के आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा शामिल हैं। दोनों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 5 सितंबर तक ED की हिरासत में भेज दिया।
ED की कार्रवाई प्रदेश के कई जिलों में एक साथ हुई। जांच एजेंसी ने कुल सात ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन PA केके चंद्रवंशी, पूर्व OSD चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत से जुड़े परिसर भी शामिल हैं।
छाबड़ा पर करोड़ों के कमीशन का आरोप
ED की ओर से अदालत में बताया गया कि DMF घोटाले की जांच के दौरान एजेंसी को कई नए दस्तावेज और सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सतपाल सिंह छाबड़ा ने कथित तौर पर करीब 30 करोड़ रुपये का कमीशन हासिल किया।
वहीं CGPSC मामले में गिरफ्तार उत्कर्ष चंद्राकर पर अलग-अलग अभ्यर्थियों से करीब 3.11 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। जांच के मुताबिक, अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन नहीं होने की स्थिति में वन विभाग में पद दिलाने का लालच भी दिया गया।
पूर्व CM के PA और OSD से जुड़े परिसरों पर भी पहुंची ED
ED की टीम सुबह भिलाई स्थित केके चंद्रवंशी के घर पहुंची। अधिकारियों ने कई घंटे तक दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। सुरक्षा के मद्देनजर घर के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
दुर्ग के सिकोला भाठा इलाके में पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के आवास पर भी जांच की गई। बताया गया है कि ED ने उनके परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की।
इसके अलावा पूर्व OSD चेतन बोरघारिया से जुड़े दो परिसरों पर कार्रवाई हुई। बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में उनसे पूछताछ की गई, जबकि धमतरी के अमलतास पुरम स्थित उनके आवास पर दस्तावेजों की जांच की गई। बोरघारिया वर्तमान में बलरामपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।
CGPSC मामले में पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
CGPSC भर्ती मामले में ED की कार्रवाई पूर्व आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई है। सोनवानी को प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। CBI की FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की थी।
CBI ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को सरकारी पदों पर चयन दिलाने के लिए कथित तौर पर पैसे का लेन-देन हुआ। जांच में डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर चयन को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।
171 पदों की भर्ती से जुड़ा है विवाद
CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कुल 171 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। प्रारंभिक परीक्षा के बाद 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद मुख्य परीक्षा में 509 उम्मीदवारों ने जगह बनाई। इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद मई 2023 में 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी।
इसी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया। अब ED की ताजा कार्रवाई के बाद जांच का दायरा और बढ़ने के संकेत हैं।
नोट: मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।