इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: पुलिस ने श्वेता को बताया कथित मास्टरमाइंड, 600 पन्नों का चालान दाखिल

कारोबारी से एक करोड़ रुपये की कथित मांग का मामला; रेशू चौधरी समेत सात आरोपी जांच के दायरे में, 9 मोबाइल और 2 पेनड्राइव की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

इंदौर। 2सितंबर 2026/मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले में पुलिस ने अपनी जांच के आधार पर अदालत में करीब 600 पन्नों का चालान पेश कर दिया है। पुलिस के अनुसार, मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में 2019 के चर्चित हनी ट्रैप प्रकरण से जुड़ी रही श्वेता विजय जैन का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने उसे कथित तौर पर पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार बताया है।

पुलिस के चालान में सागर निवासी रेशू चौधरी को श्वेता की कथित सहयोगी बताया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों समेत अन्य लोगों की भूमिका ऐसी कथित योजना में सामने आई, जिसमें फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर लोगों पर दबाव बनाने और उनसे आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की गई।

कारोबारी की शिकायत से खुला मामला

यह पूरा मामला शराब और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद सामने आया। कारोबारी ने 18 मई को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के मुताबिक, 28 अप्रैल को उन्हें रास्ते में रोककर प्रॉपर्टी कारोबार में हिस्सेदारी देने अथवा एक करोड़ रुपये देने के लिए कथित रूप से दबाव बनाया गया था। आरोप यह भी था कि कुछ फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर कारोबारी को दबाव में लेने का प्रयास किया गया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की और पूछताछ के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया।

एफआईआर में नाम नहीं, जांच आगे बढ़ी तो श्वेता तक पहुंची पुलिस

इस मामले की शुरुआती एफआईआर में श्वेता विजय जैन का नाम दर्ज नहीं था। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के दौरान आरोपितों के बयान और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर उसका नाम सामने आया।

इसके बाद पुलिस ने श्वेता को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर रेशू चौधरी समेत अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की गई।

पुलिस का दावा है कि जांच में सामने आए बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों से कारोबारी पर दबाव बनाने की कथित योजना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

फोटो-वीडियो को बनाया कथित दबाव का जरिया

पुलिस के मुताबिक, मामले में आरोपितों पर आरोप है कि उन्होंने फोटो और वीडियो के जरिए लोगों को डराने तथा उनसे आर्थिक फायदा लेने की कथित रणनीति तैयार की थी।

जांच एजेंसी का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाने तक सीमित था या इसके पीछे और लोगों को भी निशाना बनाने की योजना थी, इस पहलू की भी जांच की गई। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में संगठित तरीके से अपराध किए जाने से संबंधित धाराओं को भी शामिल किया है।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होने वाले विचारण और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही होगा।

9 मोबाइल और 2 पेनड्राइव की जांच से खुल सकते हैं नए राज

मामले में पुलिस ने नौ मोबाइल फोन, दो पेनड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है।

जांच एजेंसियां इन डिवाइस से फोटो, वीडियो, चैट और दूसरे डिजिटल डेटा की पड़ताल कर रही हैं। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी डिजिटल सामग्री के साथ छेड़छाड़, एडिटिंग या डीपफेक जैसी तकनीक का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई नया और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य सामने आता है, तो पुलिस उसे भी केस की जांच में शामिल कर सकती है।

अभी खत्म नहीं हुई पूरी जांच

करीब 600 पन्नों का चालान अदालत में दाखिल होने के बावजूद पुलिस ने जांच के सभी पहलुओं के पूरी तरह समाप्त होने की बात नहीं कही है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो पुलिस पूरक चालान दाखिल कर सकती है।

अब चालान पेश होने के बाद मामले में अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोप तय होने और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रकरण की नियमित सुनवाई शुरू होगी।

सात लोगों को बनाया गया आरोपी

पुलिस के मुताबिक, अब तक इस मामले में कुल सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस की चार्जशीट कारोबारी की शिकायत, आरोपितों से पूछताछ के दौरान सामने आए बयानों और जांच में जुटाए गए अन्य साक्ष्यों पर आधारित है।

फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट मानी जा रही है। इसके सामने आने के बाद पुलिस की जांच में नए नाम, नई भूमिका या अन्य डिजिटल साक्ष्य जुड़ते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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