26 साल बाद फिर पहनी CRPF की वर्दी: नौकरी छिनी तो मंदिर में बने संत, बेटे ने भी चुना संन्यास का रास्ता

1999 में बर्खास्त हुए गिरवर सिंह तोमर की 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार रंग लाई, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीजापुर में फिर संभाली ड्यूटी

बीजापुर 2सितंबर 2026/कहते हैं कि इंसान अगर अपने हक के लिए आखिरी दम तक लड़ता रहे तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। मुरैना के छिछावली गांव निवासी गिरवर सिंह तोमर की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। वर्ष 1999 में CRPF की नौकरी से बर्खास्त हुए गिरवर सिंह ने करीब 26 साल तक अपने हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्होंने मंदिर में रहकर पूजा-पाठ और साधना की और करीब दो दशक तक संत के रूप में जीवन बिताया। आखिरकार अगस्त 2025 में हाईकोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया और अब अगस्त 2026 में उन्होंने दोबारा CRPF की वर्दी पहनकर ड्यूटी ज्वाइन कर ली।

1991 में शुरू की थी CRPF में सेवा

गिरवर सिंह तोमर ने वर्ष 1991 में CRPF में हवलदार के पद पर नौकरी शुरू की थी। करीब आठ साल की सेवा के बाद वर्ष 1999 में एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई। इसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

नौकरी जाने के बाद गिरवर सिंह वापस अपने गांव लौट आए। उन्होंने मंदिर में रहकर पूजा-पाठ और साधना शुरू कर दी। बाद में वे गुफा मंदिर पहुंच गए, जहां वे ‘गिरवर दास महाराज’ के नाम से संत के रूप में पहचाने जाने लगे।

मंदिर में साधना के साथ जारी रखी कानूनी लड़ाई

बर्खास्तगी के बाद भले ही गिरवर सिंह ने संत का जीवन अपना लिया, लेकिन नौकरी वापस पाने की उम्मीद नहीं छोड़ी। वर्ष 1999 में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब आठ साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 2007 में फैसला उनके पक्ष में आया।

हालांकि इसके बाद CRPF की ओर से फैसले पर स्टे ले लिया गया और मामला आगे बढ़ता रहा। गिरवर सिंह ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की। इसके बाद भी कई वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही।

अगस्त 2025 में मिला बहाली का आदेश

करीब ढाई दशक की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने गिरवर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी नौकरी बहाल करने का आदेश दिया। हालांकि आदेश के बाद भी उन्हें तत्काल ड्यूटी पर नहीं लिया गया।

गिरवर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर ज्वाइनिंग की मांग जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और CRPF में उनकी दोबारा वापसी का रास्ता साफ हुआ।

अगस्त 2026 में फिर पहनी वर्दी, बीजापुर में संभाली ड्यूटी

अगस्त 2026 में वह भावुक पल आया, जिसका गिरवर सिंह को 26 वर्षों से इंतजार था। उन्होंने एक बार फिर CRPF की वर्दी पहनी। नियुक्ति आदेश मिलने के बाद वे छत्तीसगढ़ के बीजापुर पहुंचे और ड्यूटी ज्वाइन कर ली।

मंदिर से जुड़े संत भी उन्हें ट्रेन तक छोड़ने पहुंचे। लंबे समय तक संत का जीवन बिताने के बाद गिरवर सिंह का दोबारा वर्दी में लौटना मंदिर से जुड़े लोगों के लिए भी भावुक पल रहा।

पिता की नौकरी बहाल हुई तो बेटे ने चुना मंदिर का रास्ता

गिरवर सिंह के बेटे कृष्णा तोमर ने भी अब मंदिर में रहने का फैसला किया है। कृष्णा की शादी नहीं हुई है। उनका कहना है कि उनके पिता ने वर्षों तक मंदिर में रहकर भगवान की सेवा की और उन्हें विश्वास है कि भगवान के आशीर्वाद से ही उनके पिता को न्याय मिला।

कृष्णा ने पिता की दोबारा नौकरी लगने में मदद करने वाले CRPF अधिकारियों और अन्य लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब वह भी गुफा मंदिर में रहकर भगवान की सेवा करेंगे।

महंत बोले- ‘भगवान ने गिरवर की सुन ली’

गुफा मंदिर के महंत महामंडलेश्वर श्री शिवशरण महाराज के मुताबिक, गिरवर तोमर करीब 20 साल तक मंदिर में रहकर भगवान की सेवा करते रहे। वे शांत स्वभाव के थे और हमेशा भक्ति में लीन रहते थे।

महंत ने कहा कि उनकी सेवा और आस्था का फल उन्हें मिला। भगवान राम ने उनकी सुनी और आखिरकार अदालत का फैसला उनके पक्ष में आया। उन्होंने गिरवर सिंह की दोबारा ज्वाइनिंग में सहयोग करने वाले CRPF अधिकारियों और न्यायालय के प्रति भी आभार जताया।

26 साल की लड़ाई के बाद मिली वर्दी ने गिरवर सिंह की जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू कर दिया है—जहां एक तरफ वर्षों की साधना की यादें हैं, तो दूसरी तरफ फिर से देश सेवा का अवसर।

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