9मार्च2026
देश के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि देश की 65 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों को यह विश्वास होना चाहिए कि न्याय व्यवस्था उनकी परिस्थितियों और समस्याओं को समझती है। इसलिए अदालतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना समय की मांग है।
रविवार को Indian Women in Law के पहले सम्मेलन में “हाफ द नेशन–हाफ द बेंच” विषय पर बोलते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि महिला वकील किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि वे न्यायपालिका में उचित और समान प्रतिनिधित्व चाहती हैं।
उन्होंने हाईकोर्ट के कॉलेजियम से अपील की कि योग्य महिला वकीलों को जज के रूप में नियुक्त करने के लिए गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना था कि अगर न्याय व्यवस्था को वास्तव में संतुलित और समावेशी बनाना है तो इस दिशा में संस्थागत स्तर पर निरंतर प्रयास करने होंगे।
CJI के संबोधन के दौरान जब उन्होंने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही, तो सभागार में मौजूद महिला वकीलों ने जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका में सुधार कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसे मजबूत करने के लिए लगातार प्रतिबद्धता और प्रयास जरूरी हैं।