2जून2026
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सोमनी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 14 वर्षीय बीमार नाबालिग बच्ची को कथित तौर पर गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती घोषित कर दिया गया। इसके बाद बच्ची को रातभर थाने में रखकर पूछताछ और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मामला उजागर होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और संबंधित थाना प्रभारी तथा महिला हवलदार को निलंबित कर दिया गया है।
बीमार बच्ची को जांच में बताया गया गर्भवती
जानकारी के अनुसार, सोमनी क्षेत्र की रहने वाली 14 वर्षीय बच्ची की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में स्थानीय स्तर पर खरीदी गई प्रेग्नेंसी टेस्ट किट से जांच की गई, जिसमें बच्ची को गर्भवती बताया गया। रिपोर्ट सामने आते ही मामला पुलिस तक पहुंच गया और बच्ची को परिजनों सहित सोमनी थाने ले जाया गया।
थाने में रातभर पूछताछ, प्रताड़ना के गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बच्ची को पूरी रात थाने में रोके रखा। इस दौरान उसे भोजन तक नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि एक महिला पुलिसकर्मी ने बच्ची के साथ मारपीट की, उसका गला दबाया और चेहरा भी नोच दिया। परिवार का आरोप है कि पुलिस लगातार उस पर दबाव बनाती रही कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का नाम बताए, जिसके साथ उसके कथित संबंध रहे हों।
घटना के बाद बच्ची और उसका परिवार गहरे मानसिक आघात में है। ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
अगली सुबह सोनोग्राफी रिपोर्ट ने खोली पोल
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अगले दिन बच्ची की सोनोग्राफी और अन्य चिकित्सीय जांच कराई गई। इन जांचों में गर्भावस्था की कोई पुष्टि नहीं हुई और रिपोर्ट पूरी तरह नेगेटिव आई। इससे स्पष्ट हो गया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट गलत थी।
रिपोर्ट गलत साबित होते ही अस्पताल की जांच प्रक्रिया और इस्तेमाल की गई किट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
एसपी का बड़ा एक्शन, थाना प्रभारी और महिला हवलदार निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने तत्काल कार्रवाई की। सोमनी थाना प्रभारी अमन नामदेव और महिला हवलदार राजश्री सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही पूरे मामले की जांच डीएसपी केपी मरकाम को सौंपी गई है।
जांच अधिकारी को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।
जांच किट पर उठे सवाल, फॉरेंसिक लैब भेजे गए सैंपल
इस घटना के बाद अस्पताल में उपयोग की गई प्रेग्नेंसी जांच किट की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि यह किट जीवन दीप समिति के माध्यम से स्थानीय स्तर पर खरीदी गई थी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नेतराम नवरत्न ने मामले को गंभीर मानते हुए किट की गुणवत्ता जांच के आदेश दिए हैं। ड्रग विभाग द्वारा किट के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गलत पॉजिटिव रिपोर्ट कैसे सामने आई।
बाल संरक्षण आयोग भी सक्रिय
घटना की जानकारी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग जल्द ही पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात कर सकता है। साथ ही पुलिस विभाग से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
FIR की मांग पर अड़े ग्रामीण
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि बच्ची के साथ हुई कथित प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।
यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता, पुलिस व्यवहार और स्वास्थ्य विभाग की जांच व्यवस्था—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।