नई दिल्ली, 17 जुलाई 2026। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार, अशक्त और असहाय कैदियों को बड़ी राहत देते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर उनकी समयपूर्व रिहाई के लिए स्पष्ट नीति बनाने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कहा कि ऐसे कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित होनी चाहिए। इसके लिए सभी आवेदन e-Prisons पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे, जहां आवेदन से लेकर मेडिकल जांच, जेल प्रशासन की रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड की सिफारिश और अंतिम निर्णय तक की पूरी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होगी।
यह निर्देश राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और अशक्त कैदियों की मानवीय आधार पर समयपूर्व रिहाई के लिए देशभर में एक समान नीति बनाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को छह महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि नई नीति बनाने और पात्र कैदियों की पहचान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
कोर्ट के इस फैसले को जेल सुधार और मानवीय दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।