बालाघाट। वनांचल क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन के विरोध में हजारों आदिवासी सड़कों पर उतर आए। बैहर तहसील के दादर, लूद और घोंदी गांव के जंगलों में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर खनन शुरू किए जाने की तैयारी के खिलाफ गुरुवार को उकवा रेंज ऑफिस चौराहे पर जोरदार चक्का जाम किया गया। प्रदर्शन में बैहर विधायक संजय उईके सहित कई आदिवासी नेता मौजूद रहे।
ग्रामसभा की मंजूरी के बिना खनन का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रामसभाओं की अनुमति के बिना खनन स्वीकृति दी गई है, जो संविधान और आदिवासी कानूनों की भावना के विपरीत है। उनका आरोप है कि खनन प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय की सहमति और अधिकारों की अनदेखी की गई है।
बैहर क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित है, जहां भूमि अधिग्रहण और खनन जैसी गतिविधियों के लिए ग्रामसभा की स्वीकृति अनिवार्य मानी जाती है। आदिवासियों का दावा है कि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरे की आशंका
विधायक संजय उईके ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है और यह इलाका कान्हा टाइगर रिजर्व तथा पेंच टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर से जुड़ा है। ऐसे में खनन से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खनन स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज अंग्रेजी में उपलब्ध कराए गए, जिन्हें स्थानीय लोग समझ नहीं पाए। साथ ही कुछ ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर अनुमति लेने की बात भी कही गई।
पांच घंटे तक सड़क पर डटे रहे प्रदर्शनकारी
उकवा में हुए चक्का जाम के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष करीब पांच घंटे तक सड़क पर बैठे रहे। बाद में राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि खनन स्वीकृति रद्द नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
अन्य जिलों से भी मिला समर्थन
आंदोलन को जबलपुर और मंडला सहित अन्य क्षेत्रों के आदिवासी नेताओं का भी समर्थन मिला। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह सिर्फ शुरुआत है—जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
जल-जंगल-जमीन की जंग: बालाघाट में बॉक्साइट खनन के खिलाफ आदिवासियों का चक्का जाम, विधायक संजय उईके भी मैदान में