6जून2026
अंबिकापुर। सरगुजा के बहुचर्चित रिश्वतखोरी मामले में विशेष न्यायालय ने जल संसाधन विभाग के तत्कालीन सहायक ग्रेड-03 वी.के. सिन्हा को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2020 में 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। करीब छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने यह अहम फैसला सुनाया।
जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त चौकीदार लरघुराम की ग्रेच्युटी और पेंशन संबंधी फाइल लंबे समय से लंबित थी। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के बदले सहायक ग्रेड-03 वी.के. सिन्हा ने पहले भी पैसे लिए थे, लेकिन काम नहीं हुआ। बाद में उसने 8 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। परेशान परिजनों ने इसकी शिकायत एसीबी से की।
शिकायत की जांच के बाद एसीबी ने 13 अगस्त 2020 को जाल बिछाया। सत्यापन में 7 हजार रुपये में सौदा तय होने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी को रकम सौंपी, तभी एसीबी टीम ने उसे जल संसाधन विभाग कार्यालय के बाहर रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद की गई।
जांच पूरी होने के बाद एसीबी ने 22 जून 2021 को विशेष न्यायालय में चालान पेश किया। गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर चली सुनवाई के बाद 4 जून 2026 को अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा और जुर्माना लगाया।
यह फैसला सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में देर भले हो, लेकिन दोषियों को सजा जरूर मिलती है।