21मई 2026
बस्तर संभाग में वैक्सीन सप्लाई में बड़ी लापरवाही उजागर, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
रायपुर और बस्तर संभाग के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात और छोटे बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए भेजी गई ओरल पोलियो वैक्सीन की खेप में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। कई जिलों में वैक्सीन की हजारों कांच की शीशियां टूटी और चटकी हुई पाई गईं। शुरुआती जांच में करीब 8500 से ज्यादा वायल्स खराब मिली हैं, जिनसे लगभग 1.71 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक दी जा सकती थी। मामले के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, टूटे हुए वायल्स का उपयोग करने पर बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता था। इसी वजह से सभी जिलों को निर्देश जारी कर इन वायल्स को तुरंत अलग रखने और बायो-मेडिकल वेस्ट नियमों के तहत नष्ट करने को कहा गया है।
कोल्ड चेन और ट्रांसपोर्टेशन पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन खराब होने के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक वैक्सीन पहुंचाने के दौरान खराब सड़कों के कारण वाहनों में लगातार झटके लगते हैं, जिससे कांच की शीशियां आपस में टकराकर टूट सकती हैं। वहीं अत्यधिक कम तापमान में वैक्सीन जमने से भी शीशियों पर दबाव बढ़ जाता है और वे चटक जाती हैं।
इसके अलावा कुछ अधिकारियों ने निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। माना जा रहा है कि कुछ वायल्स की ग्लास मोटाई समान नहीं थी, जिसके कारण हल्के दबाव में भी वे टूट गईं।
दंतेवाड़ा और जगदलपुर में सबसे ज्यादा नुकसान
बस्तर संभाग में सबसे बड़ी खेप लगभग 40 हजार खुराकों की भेजी गई थी। जांच में इनमें से करीब 7000 वायल्स खराब पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में भेजी गई 5000 खुराकों में लगभग 1500 वायल्स टूट चुकी थीं। वहीं सुकमा जिले में भी कई वायल्स खराब मिली हैं।
सरकार को लाखों का नुकसान
सरकारी खरीद में एक पोलियो वायल की कीमत लगभग 220 से 250 रुपए बताई जा रही है। ऐसे में हजारों वायल्स के खराब होने से शासन को लाखों रुपए का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। साथ ही नई वैक्सीन सप्लाई की व्यवस्था करना भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
हैदराबाद और यूपी से होती है सप्लाई
देश में ओरल पोलियो वैक्सीन का उत्पादन मुख्य रूप से भारत बायोटेक और उत्तरप्रदेश की बिबकोल जैसी संस्थाओं में होता है। वहां से विशेष रेफ्रिजरेटेड वाहनों के जरिए वैक्सीन रायपुर स्थित स्टेट वैक्सीन स्टोर पहुंचाई जाती है, फिर अलग-अलग जिलों में भेजी जाती है।
अब स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुट गया है। अधिकारियों का कहना है कि वैक्सीन सप्लाई और स्टोरेज सिस्टम की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।