झारखंड में नक्सलवाद को बड़ा झटका, 25 हार्डकोर नक्सली आज करेंगे आत्मसमर्पण

झारखंड 21मई2026/रांची में गुरुवार को नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिलने जा रही है। झारखंड पुलिस मुख्यालय में 25 हार्डकोर नक्सली एक साथ आत्मसमर्पण करेंगे। इनमें कई सब जोनल और एरिया कमांडर स्तर के उग्रवादी शामिल हैं, जो लंबे समय से कोल्हान और सारंडा के घने जंगलों में सक्रिय थे। सुरक्षा एजेंसियां इसे राज्य में नक्सल नेटवर्क कमजोर होने का बड़ा संकेत मान रही हैं।
समर्पण करने वालों में 6 सब जोनल कमांडर, 6 एरिया कमांडर और 13 सक्रिय हार्डकोर नक्सली शामिल बताए जा रहे हैं। ये उग्रवादी अलग-अलग नक्सली दस्तों से जुड़े हुए थे और कई बड़े घटनाक्रमों में इनकी भूमिका सामने आई थी। पुलिस के अनुसार लगातार चल रहे ऑपरेशन, सुरक्षा बलों का दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं।
हथियारों का बड़ा जखीरा भी होगा जमा
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सली अपने हथियार भी पुलिस को सौंपेंगे। इनमें इंसास एलएमजी, इंसास राइफल, एसएलआर राइफल, .303 राइफल और देसी पिस्टल जैसे हथियार शामिल हैं। इसके साथ बड़ी मात्रा में मैगजीन और हजारों जिंदा कारतूस भी जमा कराए जाएंगे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे कोल्हान-सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों की ताकत को बड़ा झटका लगेगा।
कई कुख्यात नक्सलियों पर दर्ज हैं दर्जनों मामले
सरेंडर करने वालों में सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। उस पर चाईबासा जिले में ही 100 से ज्यादा मामले दर्ज बताए जाते हैं। वहीं गादी मुंडा उर्फ गुलशन मुंडा पर लेवी वसूली, टेरर फंडिंग और कई हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप हैं। महिला नक्सली कमांडरों के भी आत्मसमर्पण करने की जानकारी सामने आई है, जिन पर इनाम घोषित था।
दूसरे राज्यों तक फैला था नेटवर्क
झारखंड से जुड़े कई नक्सली हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में भी पकड़े गए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इससे साफ है कि सुरक्षा एजेंसियां अलग-अलग राज्यों में समन्वय बनाकर कार्रवाई कर रही हैं। लगातार बढ़ते दबाव के कारण नक्सली संगठन में टूटन देखने को मिल रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हार्डकोर नक्सलियों का आत्मसमर्पण झारखंड के नक्सल इतिहास की बड़ी घटनाओं में माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे जंगलों में सक्रिय बचे उग्रवादियों का मनोबल टूटेगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

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