जगदलपुर। 21मई 2026बस्तर में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक तेज, आधुनिक और जनसुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब डायल 112 सेवा केवल हिंदी या सामान्य भाषाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बस्तर की स्थानीय बोली हल्बी और गोंडी में भी लोगों की शिकायतें सुनी और समझी जाएंगी। इससे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों के लोगों को मदद मांगने में अब भाषा की परेशानी नहीं होगी।
लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव और बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने 112 सेवा के 11 आधुनिक वाहनों और एक फॉरेंसिक मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
नई डायल 112 गाड़ियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। इनमें एआई आधारित लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे किसी भी संकटग्रस्त व्यक्ति की सही स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। इससे हादसों, अपराध या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में राहत टीम कम समय में मौके तक पहुंच सकेगी।
बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए कंट्रोल सिस्टम में हल्बी और गोंडी भाषा को शामिल किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा अंदरूनी गांवों और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलेगा, जो अब अपनी भाषा में आसानी से सहायता मांग सकेंगे।
आपातकालीन सेवा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नया रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में बैकअप कंट्रोल सेंटर भी तैयार किया गया है। तकनीकी खराबी या नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में यह सेंटर स्वतः सक्रिय होकर सेवाओं को निर्बाध बनाए रखेगा।
अब नागरिक केवल फोन कॉल ही नहीं, बल्कि “112 इंडिया” मोबाइल ऐप, एसएमएस, ईमेल, वेब प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए भी मदद मांग सकेंगे। महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल ऐप में विशेष पैनिक बटन और निगरानी सुविधा जोड़ी गई है।
इस एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से पुलिस, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और महिला हेल्पलाइन जैसी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। अधिकारियों ने इसे बस्तर में आधुनिक पुलिसिंग और जनसुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
एआई तकनीक से लैस हुई बस्तर की डायल 112, हल्बी-गोंडी में भी तुरंत पहुंचेगी मदद