5जून2026
नई दिल्ली। मालवीय नगर के एक होटल में लगी भीषण आग के दौरान कई लोगों की जान बचाने वाले 61 वर्षीय गद्दा व्यापारी रियाजुद्दीन मंसूरी आज खुद आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आग की भयावह घटना में उन्होंने अपनी दुकान के गद्दे और रजाइयां निकालकर होटल की ऊपरी मंजिलों में फंसे लोगों के लिए जीवनरक्षक ढाल का काम किया, लेकिन इस मानवीय प्रयास की कीमत उन्हें अपनी दुकान और लाखों के सामान के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी।
घटना के दौरान जैसे ही होटल में आग लगने की सूचना मिली, रियाजुद्दीन अपने बेटे अरमान मंसूरी के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। होटल से उठती लपटें और लोगों की चीख-पुकार देखकर दोनों ने बिना समय गंवाए अपनी दुकान से गद्दे, रजाइयां और चादरें बाहर निकालकर इमारत के नीचे बिछा दीं। इससे होटल की ऊपरी मंजिलों पर फंसे कई लोगों को कूदकर अपनी जान बचाने का मौका मिला। बाद में दमकलकर्मियों और स्थानीय लोगों ने भी इन्हीं चादरों और गद्दों का इस्तेमाल घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया।
रियाजुद्दीन का कहना है कि उस समय उनके मन में केवल लोगों की जान बचाने का विचार था। उन्होंने नुकसान की परवाह नहीं की, लेकिन अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं तो उनकी दुकान लगभग खाली हो चुकी है और आग की चपेट में आने से उसे भी काफी नुकसान पहुंचा है। उनका अनुमान है कि उन्हें करीब डेढ़ से दो लाख रुपये तक की आर्थिक क्षति हुई है।
व्यापारी का आरोप है कि होटल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा आसपास के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिन्होंने संकट की घड़ी में आगे बढ़कर लोगों की जान बचाने में मदद की, सरकार को कम से कम उनकी क्षति की भरपाई करनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली सरकार से मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि अगर मदद मिलती है तो वे दोबारा अपना कारोबार खड़ा कर पाएंगे।
रियाजुद्दीन ने बताया कि वर्षों पहले सिविल डिफेंस स्वयंसेवक के रूप में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें आपात स्थिति में तेजी से निर्णय लेने और लोगों की मदद करने का साहस दिया। आज उनकी बहादुरी और मानवता की मिसाल की हर ओर सराहना हो रही है, लेकिन वे उम्मीद कर रहे हैं कि उनके इस साहसिक कदम की कीमत उन्हें अकेले न चुकानी पड़े।