20अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। प्रोफेसर पर आरोप है कि उन्होंने NSS कैंप के दौरान हिंदू छात्रों को उनकी इच्छा के खिलाफ नमाज़ पढ़ने के लिए मजबूर किया था।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि जांच में ऐसे पर्याप्त प्रारंभिक साक्ष्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर मामले की सुनवाई जरूरी है। इस स्तर पर केस को खत्म करना उचित नहीं होगा।
मामला मार्च 2025 का है, जब NSS कैंप में ईद के मौके पर कुछ छात्रों को नमाज़ के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि अन्य छात्रों पर भी इसमें शामिल होने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर सर्टिफिकेट रद्द करने जैसी धमकियां दी गईं। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
प्रोफेसर की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय उनकी कोई सक्रिय भूमिका नहीं थी और वे मौके पर मौजूद भी नहीं थे। वहीं राज्य पक्ष ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए अब साक्ष्यों की जांच ट्रायल कोर्ट में ही होनी चाहिए।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस तरह की कार्यवाही को रोकना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रोफेसर के सभी तर्कों की जांच अब ट्रायल के दौरान गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर होगी।
अंततः हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करना तथ्यों का पहले से फैसला करने जैसा होगा, जो न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है।