20अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले से जुड़े दो अहम पहलुओं को एक साथ सुनने का फैसला लिया है। इनमें एक मामला CBI को अपील की अनुमति से जुड़ा है, जबकि दूसरा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले से संबंधित है, जिसमें अमित जोगी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई थी।
अब इन दोनों मामलों पर 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई होगी, जिसे इस केस का अहम मोड़ माना जा रहा है।
यह मामला 4 जून 2003 की उस सनसनीखेज घटना से जुड़ा है, जब कारोबारी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने उस समय प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था। जांच के दौरान कई आरोपी सामने आए, जिनमें से कुछ सरकारी गवाह भी बने।
पहले विशेष सीबीआई अदालत रायपुर ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला उच्च अदालतों तक पहुंचा।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। 23 अप्रैल को यह साफ हो सकता है कि अमित जोगी को राहत मिलेगी या फिर हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा।