तूता (नया रायपुर), छत्तीसगढ़ | 19 मार्च 2026
चैत्र नवरात्रि के पावन माहौल में, जब हर ओर देवी भक्ति और आस्था की गूंज है, उसी बीच तूता धरना स्थल पर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहाँ डी.एल.एड. अभ्यर्थियों की “न्याय की कलश यात्रा” प्रशासनिक रोक के कारण शुरू होने से पहले ही थम गई। सैकड़ों युवा, हाथों में कलश और चेहरे पर उम्मीद लिए, मंदिर तक पहुँचने से पहले ही बैरिकेड्स के सामने रुक गए।
करीब 86 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे ये अभ्यर्थी 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपनी मांग को देवी के चरणों में अर्पित करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से शीतला मंदिर तक कलश यात्रा निकालना चाहते थे। इस यात्रा में प्रदेश के कई जिलों—जशपुर, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, कोरिया और नारायणपुर से आए युवा शामिल हुए।
हालांकि, भारी पुलिस बल की मौजूदगी और कड़ी बैरिकेडिंग के चलते यह यात्रा धरना स्थल के मुख्य द्वार से आगे नहीं बढ़ पाई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के रोका, जबकि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते थे।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, यह सिर्फ नौकरी की मांग नहीं, बल्कि उनके भविष्य और हक का सवाल है। उनका दावा है कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पद खाली पड़े हैं और वे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और अनुमति प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी साफ नजर आ रही है।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल, तूता का धरना स्थल अब सिर्फ विरोध का केंद्र नहीं, बल्कि उम्मीद और संघर्ष की कहानी भी बन चुका है—जहाँ “न्याय की कलश यात्रा” भले रुक गई हो, लेकिन न्याय की मांग अब और बुलंद हो रही है।
हाथों में कलश, आँखों में न्याय की आस…धरना स्थल पर ही रोके गए D.El.Ed. अभ्यर्थी, सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप