20अप्रैल 2026
राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक कैफे के बाहर शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है। 14अप्रैल को जेएलएन मार्ग स्थित चर्चित कैफे 1932 Trevi में पारंपरिक भारतीय वेशभूषा—धोती-कुर्ता और चप्पल—पहनकर पहुंचे एक व्यक्ति को अंदर जाने से रोक दिया गया।
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति वृंदावन से आए आचार्य थे, जिन्हें कैफे के स्टाफ ने “ड्रेस कोड” का हवाला देते हुए एंट्री देने से मना कर दिया। कैफे प्रबंधन का कहना था कि परिसर में प्रवेश के लिए जूते और ट्राउजर अनिवार्य हैं, जबकि ओपन फुटवियर और पारंपरिक पहनावे की अनुमति नहीं है।
इस दौरान हुई बहस का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स ने इसे भारतीय संस्कृति का अपमान बताया, तो कुछ ने निजी संस्थानों के ड्रेस कोड के अधिकार का समर्थन भी किया।
घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आधुनिकता के नाम पर पारंपरिक पहनावे को नजरअंदाज किया जा सकता है? या फिर निजी संस्थानों को अपने नियम तय करने की पूरी आजादी होनी चाहिए?
फिलहाल यह मामला केवल एक कैफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि “संस्कृति बनाम नियम” की बहस में बदल चुका है, जिस पर देशभर में अलग-अलग राय सामने आ रही है।