माओवाद के गढ़ से विकास की राह पर कोलेंग

जगदलपुर, 18मई 2026।
बस्तर का वह सुदूर वनांचल, जहां कभी माओवाद का साया और भय का माहौल विकास की हर संभावना पर भारी पड़ता था, आज बदलाव और तरक्की की नई कहानी लिख रहा है। दरभा विकासखंड का कोलेंग क्षेत्र, जो वर्षों तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा, अब विकास की मुख्यधारा से जुड़कर नई पहचान बना रहा है। सड़कों, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार ने इस इलाके की तस्वीर ही बदल दी है।
कभी ऐसा समय था जब कोलेंग और उसके आसपास के गांव बारिश के दिनों में पूरी तरह टापू बन जाते थे। ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल सफर करना पड़ता था। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
जगदलपुर से लेकर कोलेंग, चांदामेटा, छिंदगुर, काचीरास, सरगीपाल और कान्दानार जैसे दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का निर्माण हो चुका है। इन सड़कों ने न केवल गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ा है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास भी जगाया है। अब एम्बुलेंस सेवाएं गांव तक पहुंच रही हैं, बच्चों की शिक्षा सुचारू हो रही है और ग्रामीण आसानी से बाजार एवं सरकारी सेवाओं तक पहुंच पा रहे हैं।
कोलेंग के सरपंच श्री लालूराम नाग बताते हैं कि पहले यह इलाका पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटा हुआ था। ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी लंबा संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन माओवाद की समस्या कम होने और शासन-प्रशासन की सक्रिय पहल से गांवों में विकास की नई बयार आई है। लोगों का जीवन स्तर तेजी से सुधर रहा है और अब ग्रामीण भी शासन की योजनाओं का लाभ सीधे प्राप्त कर रहे हैं।
छिंदगुर के सरपंच  सुकमन नाग का कहना है कि सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार ने गांवों की तकदीर बदल दी है। सरकार की अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने की प्रतिबद्धता का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। अब ग्रामीण अपनी वनोपज और कृषि उत्पाद सीधे मंडियों तक ले जा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। सड़क निर्माण, छोटे व्यवसाय और कृषि आधारित गतिविधियों ने स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से ग्रामीणों का जीवन अधिक सुरक्षित और बेहतर हुआ है।
कभी उपेक्षा और भय की पहचान बना यह वनांचल अब विकास, विश्वास और खुशहाली की नई मिसाल बनता जा रहा है। कोलेंग क्षेत्र का यह बदलाव न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि विकास की रोशनी सबसे दुर्गम इलाकों तक पहुंच रही है।

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