17मार्च2026
दिल्ली के एम्स दिल्ली में भर्ती हरीश राणा की जिंदगी अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। वर्षों से अचेत अवस्था में जी रहे हरीश के लिए अब निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
अस्पताल ने धीरे-धीरे उनके सभी जीवन-रक्षक साधनों को हटाना शुरू कर दिया है। पहले उन्हें ट्यूब के जरिए भोजन दिया जा रहा था, जिसे बंद कर दिया गया। अब पानी की सप्लाई भी रोकने का निर्णय लिया गया है। ऑक्सीजन सपोर्ट पहले ही हटाया जा चुका है।
यह फैसला हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्देश के बाद लागू हुआ है, जिसमें विशेष परिस्थितियों में इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई है। डॉक्टरों की टीम तय प्रोटोकॉल के तहत यह प्रक्रिया पूरी कर रही है, जिसमें मरीज को किसी प्रकार की पीड़ा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में 2 से 4 हफ्तों का समय लग सकता है। इस दौरान मरीज को पेलिएटिव केयर (दर्द से राहत देने वाली चिकित्सा) दी जाती है ताकि उसे किसी तरह की तकलीफ महसूस न हो।
करीब 13 साल पहले हुए एक हादसे के बाद से हरीश राणा अचेत अवस्था में थे। परिवार ने लंबे संघर्ष के बाद यह कठिन फैसला लिया है। इस समय उनके परिजन उनके साथ हैं और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
यह मामला न केवल चिकित्सा जगत बल्कि समाज के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या जीवन को इस तरह समाप्त करने का निर्णय सही है, या यह पीड़ा से मुक्ति का एक मानवीय तरीका है?