14जून2026
जगदलपुर। बस्तर की समृद्ध जैव-विविधता, पारंपरिक कृषि विरासत और प्राकृतिक स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जगदलपुर स्थित क्रांतिकारी डेबरीधुर उद्यानिकी महाविद्यालय परिसर में दो दिवसीय ‘बस्तर आम महोत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग तथा उद्यानिकी संचालनालय रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ से आए 1500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। किसानों द्वारा 2000 से अधिक पारंपरिक, उन्नत और हाइब्रिड आम की दुर्लभ एवं अनूठी प्रजातियों का प्रदर्शन किया गया, जिससे पूरा परिसर आम की सुगंध और रंग-बिरंगी किस्मों से सराबोर हो उठा।
महोत्सव के मुख्य अतिथि बस्तर सांसद महेश कश्यप ने बस्तर के आमों की ‘जीरो-केमिकल’ गुणवत्ता को इसकी सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए इसे वैश्विक स्तर पर प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने की बात कही। उन्होंने वर्ष 2031 तक बस्तर को देश का सबसे उन्नत जनजातीय संभाग बनाने का संकल्प दोहराते हुए कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी।
क्षेत्रीय विधायक किरण सिंह देव ने किसानों द्वारा प्रदर्शित आमों की विविधता और उद्यानिकी महाविद्यालय के छात्रों द्वारा तैयार किए गए ‘56 भोग’ की सराहना करते हुए भविष्य में इस आयोजन को शहर के प्रमुख केंद्र में आयोजित करने का सुझाव दिया। वहीं महापौर संजय पाण्डे ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए आम के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि आर. सक्सेना ने खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए किसानों से कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कृत्रिम तरीके से पकाए गए फलों की तुलना में बस्तर के प्राकृतिक और जैविक आमों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी मांग है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आम से जैम, जेली, आइसक्रीम सहित विभिन्न उत्पाद तैयार कर मूल्य संवर्धन करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
दो दिवसीय इस महोत्सव में आम की दुर्लभ किस्मों की प्रदर्शनी के साथ-साथ रंगोली, पोस्टर मेकिंग और फैंसी ड्रेस जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। यह आयोजन किसानों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और आम प्रेमियों के लिए ज्ञान, नवाचार और कृषि संभावनाओं का अनूठा संगम साबित हो रहा है।