26मार्च2026
बस्तर जिले की ग्रामीण महिलाएं अब पूजा सामग्री तैयार कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिससे वे मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में उपयोग होने वाली सामग्री स्वयं तैयार कर सकेंगी।
जिला प्रशासन की पहल पर ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान आड़ावाल, जगदलपुर में 13 मार्च से 18 मार्च तक छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को पूजा सामग्री निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आय के नए अवसरों से जोड़ना है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली कई तरह की सामग्रियां बनाना सिखाया जा रहा है। इनमें फूलों की माला तैयार करना, धूप और अगरबत्ती बनाना, रूई की बत्तियां तैयार करना और पूजा में चढ़ाई जाने वाली चुनरी, सिंदूर पैकेट, सजावटी टोकरियां तथा चूड़ी पैकेट बनाना शामिल है।
इसके अलावा महिलाओं को प्रसाद बनाने की प्रक्रिया भी सिखाई जा रही है, जिसमें इलायची दाना, लड्डू सहित अन्य भोग सामग्री तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। धार्मिक स्थलों की सजावट को ध्यान में रखते हुए पताका, रंगोली और हस्तशिल्प उत्पाद जैसे मिट्टी के दीये, मटके और अन्य सजावटी वस्तुएं बनाने की कला भी सिखाई जा रही है।
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं के कौशल में निखार आएगा और वे स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार कर मंदिरों और धार्मिक आयोजनों की जरूरतें पूरी करते हुए आय अर्जित कर सकेंगी। प्रशिक्षण संस्थान के संचालक किरण कुमार के अनुसार, यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ स्व-सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के नए रास्ते खोलने में मददगार साबित होगी।