दोस्ती में दगा: मल्टीलेवल पार्किंग से 36.50 लाख गायब, करीबी दोस्त ही निकला मास्टरमाइंड — पुलिस ने रकम सहित दो आरोपी दबोचे

रायपुर, 17 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लाखों रुपये के गबन के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह रही कि वारदात को अंजाम देने वाला कोई बाहरी गिरोह नहीं, बल्कि पीड़ित का भरोसेमंद मित्र ही निकला। पुलिस ने आरोपियों के पास से पूरी 36 लाख 50 हजार रुपये की नगदी भी बरामद कर ली है।
जमीन सौदे के दौरान हुआ खेल
मिली जानकारी के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी पिरदा निवासी ज्ञानप्रकाश पांडे 16 फरवरी को जमीन से संबंधित कार्य के लिए कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अपनी कार महतारी चौक के पास मल्टीलेवल पार्किंग में खड़ी की थी। कार में बड़ी रकम होने के कारण उन्होंने अपने मित्र नितिन सोनी को चाबी देकर वाहन के पास रुकने को कहा और खुद दफ्तर चले गए।
कुछ देर बाद नितिन ने फोन कर बताया कि कार में रखे सफेद बैग से 36.50 लाख रुपये चोरी हो गए हैं। सूचना मिलते ही ज्ञानप्रकाश मौके पर पहुंचे और रकम गायब पाई गई। संदेह होने पर नितिन से पूछताछ की गई, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
सीसीटीवी और तकनीक से खुला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट तथा सिविल लाइन पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू की। पार्किंग क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें कार के आसपास एक संदिग्ध स्कूटी सवार की गतिविधियां सामने आईं। तकनीकी विश्लेषण और पूछताछ के दौरान नितिन के बयान बार-बार बदलने लगे, जिससे पुलिस का शक गहराता गया।
आखिरकार सख्ती से पूछताछ करने पर उसने पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया।
कर्ज ने बनवाया अपराधी
जांच में सामने आया कि नितिन सोनी आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में था। उसने अपने साथी तनवीर आलम के साथ मिलकर पहले से योजना बनाई थी। मौके का फायदा उठाकर कार से पूरी रकम निकाल ली गई। समझौते के तहत तनवीर को 2 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी।
पूरी रकम बरामद, दोनों गिरफ्तार
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से पूरी 36.50 लाख रुपये की नगदी बरामद कर ली। मामले का खुलासा डीसीपी सेंट्रल उमेश गुप्ता ने किया। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आपराधिक विश्वासघात का स्पष्ट उदाहरण है, जिसमें सूझबूझ और तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंचना संभव हो पाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *