जगदलपुर/बस्तर।29/04/26बस्तर की धरती एक बार फिर अपने भीतर समाए प्राचीन रहस्यों के कारण चर्चा में है। वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहे दुर्गम इलाकों में अब जब वैज्ञानिक और शोध दल पहुंच रहे हैं, तो यहां से मानव सभ्यता के बेहद पुराने साक्ष्य सामने आ रहे हैं। हालिया सर्वेक्षण में पूरे बस्तर अंचल में 31 ऐसे रॉक आर्ट या शैलचित्र स्थलों की पहचान की गई है, जहां प्रागैतिहासिक मानव जीवन के प्रमाण पत्थरों और गुफाओं की दीवारों पर दर्ज मिले हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये शैलचित्र लगभग 5000 वर्ष या उससे भी अधिक पुराने हो सकते हैं।
इन स्थलों में कांकेर, नारायणपुर, अबूझमाड़ और बस्तर के अन्य वनांचल क्षेत्र प्रमुख हैं। यहां मिले चित्र केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उस समय के सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जीवन की कहानी भी बयां करते हैं। कई स्थानों पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के हाथों के निशान पाए गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि उस समय परिवार आधारित समुदाय यहां निवास करते थे। कांकेर के कुछ शैलचित्रों में बड़े आकार के हाथों के निशान विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार इन चित्रों में शिकार के दृश्य, दैनिक जीवन, समूह गतिविधियां और हथियारों के प्रयोग के संकेत स्पष्ट दिखाई देते हैं। कुछ शैलचित्रों में ऐसे औजारों का चित्रण भी मिला है, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि बस्तर क्षेत्र के प्राचीन निवासी धातु या लौह उपयोग की प्रारंभिक जानकारी रखते थे। यह तथ्य बस्तर की प्राचीन सभ्यता को और अधिक समृद्ध बनाता है।
विशेषज्ञों की टीम लगातार इन दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा कर रही है और अब तक 31 में से 13 स्थलों का विस्तृत दस्तावेजीकरण पूरा किया जा चुका है। हालांकि लंबे समय से संरक्षण के अभाव, मौसम के प्रभाव और मानवीय हस्तक्षेप के कारण कई शैलचित्र धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त भी हो रहे हैं। वैज्ञानिक इन अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों से उनकी सटीक आयु निर्धारित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बस्तर में मिले ये शैलचित्र न केवल इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि यह भी साबित कर रहे हैं कि यहां हजारों वर्ष पहले विकसित और संगठित मानव बसाहट मौजूद थी। आने वाले समय में यदि इन स्थलों का पूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण होता है, तो बस्तर विश्व स्तर पर प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है। यह खोज बस्तर को केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऐतिहासिक मानचित्र पर भी विशेष स्थान दिला सकती है।
बस्तर की पहाड़ियों में छिपा 5 हजार साल पुराना मानव इतिहास: 31 शैलचित्र स्थलों ने चौंकाया