सुकमा में 22 माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण, हिंसा छोड़ मुख्यधारा की ओर बढ़े कदम

सुकमा, 17 फरवरी 2026। दक्षिण बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा से सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। यहां 22 सक्रिय माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर हथियारबंद रास्ता छोड़ने और सामान्य जीवन अपनाने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में एक महिला सदस्य भी शामिल है, जिसे अधिकारियों ने सकारात्मक संकेत बताया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोग लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे। आत्मसमर्पण की औपचारिक प्रक्रिया पुलिस अधीक्षक कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों तथा सुरक्षा बलों की मौजूदगी में पूरी कराई गई। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम जिले में शांति और विकास के माहौल को मजबूत करेगा।
पुनर्वास नीति और अभियान का असर
प्रशासन का मानना है कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और क्षेत्र में चलाए जा रहे विशेष अभियानों का प्रभाव अब स्पष्ट दिखने लगा है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसे प्रयासों ने माओवादी संगठनों में सक्रिय लोगों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। इस अभियान का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास बहाली और समाज की मुख्यधारा से जुड़ाव बढ़ाना है।
विकास और सुरक्षा दबाव से कमजोर हुआ नेटवर्क
अधिकारियों के मुताबिक, लगातार ऑपरेशन, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से माओवादी नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की पहुंच मजबूत होने से युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नए विकल्प भी खुल रहे हैं, जिससे संगठन की पकड़ कमजोर पड़ रही है।
सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति का परिणाम
इस उपलब्धि में जिला पुलिस, डीआरजी, केंद्रीय बलों और विशेष इकाइयों की समन्वित कार्रवाई की अहम भूमिका बताई जा रही है। सुरक्षा बलों के अभियान के साथ-साथ सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों ने भी आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित किया।
मिलेगा आर्थिक सहयोग और पुनर्वास लाभ
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही उन्हें कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सहायता और सामाजिक पुनर्स्थापन से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
जिला प्रशासन ने इसे शांति और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में और लोग हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से

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