12मई2026
छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार ने अब नया और चौंकाने वाला तरीका अपना लिया है। महासमुंद और धमतरी जिलों में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गांजा तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जहां तस्कर कपड़े बेचने वाले फेरीवालों का भेष धारण कर अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस कार्रवाई में कुल करीब 378 किलो गांजा बरामद किया गया है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1.90 से 2 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस पूरे मामले में 13 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
कैसे चलता था पूरा खेल?
जांच में सामने आया कि तस्कर ओडिशा से गांजा लाकर मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में सप्लाई करते थे। पकड़ से बचने के लिए उन्होंने बेहद शातिर तरीका अपनाया था।
वे बाइक पर कपड़ों के गट्ठर लादकर घूमते थे और खुद को फेरीवाला बताते हुए गलियों में “कपड़े ले लो, कपड़े” की आवाज लगाते थे। लेकिन असलियत कुछ और ही थी।
पुलिस को जब शक हुआ और वाहनों की जांच की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बाइकों में लोहे के खास सीक्रेट बॉक्स और चैंबर बनाए गए थे, जिनमें गांजा छिपाकर रखा गया था। ऊपर से कपड़े रखकर इसे पूरी तरह ढक दिया जाता था ताकि किसी को शक न हो।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
महासमुंद पुलिस ने चार अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए करीब 215 किलो गांजा जब्त किया और कई आरोपियों को दबोचा।
वहीं धमतरी जिले के केरेगांव क्षेत्र में भी पुलिस ने छापेमारी कर 131 किलो से अधिक गांजा बरामद किया। यहां तस्कर तीन बाइक के जरिए ओडिशा से खेप लेकर आ रहे थे।
इसके अलावा कोमाखान क्षेत्र में भी एक बाइक से करीब 9 किलो गांजा जब्त किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
इस पूरे नेटवर्क में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़े कई आरोपी शामिल पाए गए हैं। कुल मिलाकर 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनसे पूछताछ जारी है।
बड़ा सवाल
धमतरी में हुई इस तस्करी ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्कर चार थानों की सीमाएं पार कर आसानी से जिले तक पहुंच गए, लेकिन कहीं भी उन्हें रोका नहीं जा सका।