6जून2026
हैदराबाद। कभी जंगलों में सक्रिय माओवादी आंदोलन का हिस्सा रहे तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी आज शिक्षा और कानून के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का सपना देख रहे हैं। तेलंगाना लॉ कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (LAWCET) 2026 में राज्य स्तर पर 349वीं रैंक हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जीवन में बदलाव की शुरुआत किसी भी मोड़ से की जा सकती है।
करीब चार दशकों तक उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद देवजी ने हाल ही में आत्मसमर्पण कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताते हुए मुख्यधारा का रास्ता चुना। अब उनका लक्ष्य कानून की पढ़ाई कर समाज के गरीब, आदिवासी और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संवैधानिक तरीके से संघर्ष करना है।
देवजी की सफलता इसलिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने वर्षों पहले अधूरी छूट चुकी पढ़ाई को फिर से शुरू किया। छात्र जीवन के दौरान पढ़ाई छोड़कर आंदोलन का हिस्सा बनने वाले देवजी ने विशेष अनुमति लेकर अपनी शैक्षणिक पात्रता पूरी की और इसके बाद कानून प्रवेश परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि उनके दृढ़ संकल्प और नई जिंदगी शुरू करने की इच्छा को दर्शाती है।
उनकी यह यात्रा तेलंगाना की चर्चित मंत्री सीताक्का की कहानी की भी याद दिलाती है। सीताक्का ने भी कभी नक्सल आंदोलन से जुड़ने के बाद मुख्यधारा में वापसी की थी। शिक्षा हासिल कर उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और बाद में राजनीति में सक्रिय होकर आज राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। यही कारण है कि देवजी की उपलब्धि को भी एक संभावित बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में पुनर्वास और शिक्षा के अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपनी दिशा बदल सकता है। देवजी का उदाहरण इस बात को मजबूत करता है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से भी समाज सेवा की जा सकती है।
फिलहाल देवजी की 349वीं रैंक केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और नई शुरुआत की कहानी बन गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या वे भी शिक्षा और कानून के क्षेत्र में आगे बढ़कर समाज में वही प्रभाव छोड़ पाएंगे, जैसा कभी मुख्यधारा में लौटकर सीताक्का ने किया था।