जगदलपुर, 21 जनवरी 2026/
बस्तर जिला प्रशासन ने ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए ‘पढ़ेसे बस्तर अभियान’ की शुरुआत की है। कलेक्टर हरिस एस एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य बच्चों में पठन-पाठन की आदत विकसित करना और उन्हें ज्ञान की मुख्यधारा से जोड़ना है।
इस अभियान के अंतर्गत जिले के सुदूर एवं पहुंचविहीन इलाकों में बहुभाषी मिनी लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं, ताकि बच्चों को पुस्तकों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। यह महत्वाकांक्षी परियोजना स्वयंसेवी संगठन प्रथम बुक्स की पहल डोनेट-ए-बुक के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसमें बच्चों को ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अभियान की सफलता इसी से स्पष्ट होती है कि अब तक 4,788 पुस्तकें वितरित की जा चुकी हैं, जबकि 43 नई मिनी लाइब्रेरी के माध्यम से 4,477 अतिरिक्त पुस्तकों की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध ये पुस्तकें बच्चों को उनकी संस्कृति से जोड़ते हुए पढ़ने के प्रति रुचि बढ़ा रही हैं।
शिक्षा के प्रसार के लिए प्रशासन ने पारंपरिक सोच से आगे बढ़ते हुए इन मिनी लाइब्रेरी को केवल शासकीय स्कूलों तक सीमित नहीं रखा है। जिले के पुलिस थाने, जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र, दिव्यांग बच्चों के केंद्र एवं बाल देखभाल संस्थान भी अब ज्ञान के केंद्र बनते जा रहे हैं।
इस अभियान में शिक्षा विभाग के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, समाज कल्याण एवं पुलिस विभाग का समन्वित सहयोग देखने को मिल रहा है, जो प्रशासनिक सहभागिता की एक नई मिसाल पेश करता है।
बस्तर जिला प्रशासन की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, निपुण भारत मिशन एवं सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2026 तक सभी बच्चों के लिए आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान सुनिश्चित करना है।
कुल मिलाकर, ‘पढ़ेसे बस्तर अभियान’ बच्चों को शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
‘पढ़ेसे बस्तर’ से रोशन हो रहा भविष्य: सुदूर अंचलों में मिनी लाइब्रेरी की सौगात, शिक्षा को मिल रही नई दिशा