बस्तर के नन्हे वैज्ञानिकों ने उड़ीसा में खोजे विज्ञान और संस्कृति के नए आयामराष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत विद्यार्थियों का सफल अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण

जगदलपुर, 15 फरवरी 2026।
बस्तर जिले के विद्यार्थियों के लिए इस बार शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने प्रयोग और अनुभव के माध्यम से विज्ञान और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर पाया। समग्र शिक्षा के निर्देशानुसार राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत चयनित विद्यार्थियों का उड़ीसा के भुवनेश्वर और पुरी का अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
जिला कलेक्टर आकाश छिकारा और जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, गणित, नवाचार और भारतीय विरासत के प्रति जिज्ञासा और समझ विकसित करना रहा। जिला शिक्षा अधिकारी बी.आर. बघेल ने बताया कि यह पहल बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखकर की गई है।
20 सदस्यीय दल को जिला मिशन परियोजना समन्वयक अशोक पांडे और एबीईओ राजेश गुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। भ्रमण की शुरुआत भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय से हुई, जहां विद्यार्थियों ने जीवाश्म, पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता से जुड़े विषयों को करीब से जाना। विशाल व्हेल और मगरमच्छ के कंकाल बच्चों के लिए विशेष आकर्षण रहे।
इसके बाद पठानी सामंत प्लेनेटेरियम में आयोजित सत्र ने विद्यार्थियों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों के जीवन चक्र और ग्रहों की कार्यप्रणाली के रहस्यों से परिचित कराया। क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र में जुरासिक पार्क, गणित और दर्पण गैलरी के मॉडल्स ने बच्चों को प्रयोग के माध्यम से सीखने का अवसर दिया। मार्गदर्शक शिक्षक मनीष कुमार अहीर और दीप्ति ठाकुर ने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया।
विद्यार्थियों को नंदनकानन वन्यप्राणी अभयारण्य भी ले जाया गया, जहां उन्होंने विभिन्न वन्य जीवों को प्रत्यक्ष देखा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझा। भ्रमण के दौरान पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर, भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के दर्शन कर बच्चों ने भारतीय स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के बारे में भी जाना। पुरी समुद्र तट पर उन्होंने समुद्री पारिस्थितिकी, ज्वार-भाटा और प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावों को समझा।
कार्यक्रम प्रभारी जयनारायण पाणिग्रही, एस.एन. निर्मलकर, परमेश्वर पांडे तथा सहयोगी गीता और फिरोज के प्रयासों से यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और अनुभव का यादगार अवसर बना। इस यात्रा ने बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और टीमवर्क की भावना को मजबूत किया है तथा उनके भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीज बोए हैं, जो भविष्य में उनके विकास में सहायक होंगे।

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