श्वेत क्रांति की ओर बढ़ता बस्तर: गुजरात के डेयरी मॉडल से सीख रहे पशुपालक और बिहान समूह की महिलाएं

जगदलपुर, 15 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल अब जमीन पर उतरती नजर आ रही है। इसी कड़ी में पशुपालकों और बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल गुजरात के बनासकांठा पहुंचकर वहां के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कर रहा है। बस्तर के 22 प्रतिनिधियों सहित प्रदेश के कुल 56 सदस्य इस अध्ययन भ्रमण में शामिल हैं, जहां वे एशिया की अग्रणी डेयरी प्रणालियों में से एक बनास डेयरी और विश्व प्रसिद्ध सहकारी ब्रांड अमूल की कार्यप्रणाली को करीब से समझ रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की इस पहल के तहत उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप स्वयं दल का नेतृत्व कर रहे हैं, जो इस कार्यक्रम की गंभीरता और प्राथमिकता को दर्शाता है।
प्रतिनिधिमंडल के लिए यह दौरा केवल अवलोकन नहीं बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर बन गया है। प्रतिभागी दुग्ध संकलन केंद्रों, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और विपणन व्यवस्था को समझते हुए यह सीख रहे हैं कि किस प्रकार छोटे पशुपालक भी मजबूत सहकारी तंत्र से जुड़कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। विशेष रूप से बिहान समूह की महिलाएं महिला उद्यमिता के माध्यम से डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मॉडल को समझने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि बस्तर लौटकर स्थानीय स्तर पर क्लस्टर विकसित किए जा सकें।
अध्ययन प्रवास के दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और अमूल के विशेषज्ञ संतुलित पशु आहार, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन की तकनीकी जानकारी भी दे रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारी भी इस यात्रा में शामिल होकर बस्तर में इस मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर पशुपालन आधारित आय के स्थायी विकल्प उपलब्ध कराना है। 18 फरवरी तक चलने वाले इस भ्रमण के बाद उम्मीद है कि यहां से सीखी गई तकनीकें बस्तर में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी पैदा करेंगी। इससे सहकारिता के माध्यम से समृद्धि का सपना साकार होने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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