जगदलपुर, 20 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा की तस्वीर बदलने और शैक्षणिक सत्र 2025-26 के परीक्षा परिणामों में गुणात्मक सुधार लाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक व्यापक और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना लागू की है। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर हरिस एस एवं सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले के सभी प्राचार्यों को पढ़ाई के तरीके के साथ-साथ परिणाम तैयार करने की प्रणाली में अहम बदलाव के निर्देश दिए गए हैं।
नए आदेश के तहत मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब छात्रों के रिपोर्ट कार्ड में पूरे वर्ष की मेहनत झलकेगी। कक्षा पहली से चौथी और छठवीं-सातवीं के वार्षिक परिणामों में तिमाही व छमाही परीक्षाओं के 20-20 प्रतिशत अंक जोड़े जाएंगे, जबकि वार्षिक परीक्षा का भार 60 प्रतिशत रहेगा। वहीं कक्षा पांचवीं और आठवीं की बोर्ड कक्षाओं के साथ कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं में छमाही परीक्षा के 30 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा के 70 प्रतिशत अंकों के आधार पर अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी बी.आर. बघेल ने बताया कि कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत के सतत मार्गदर्शन में हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम हासिल करने के लिए “मिशन डिस्टिंक्शन” के तहत कड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। अर्द्धवार्षिक परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक छात्र-छात्रा के लिए एक मेंटर नियुक्त किया जाएगा, जो साप्ताहिक समीक्षा के साथ पढ़ाई, लिखावट, भाषा शैली और अन्य कमियों में सुधार पर विशेष ध्यान देंगे।
इसके साथ ही पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद पिछले पांच वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास अनिवार्य किया गया है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी मेरिट सूची में स्थान बना सकें। लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि कम से कम 5 प्रतिशत विद्यार्थी 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करें और तृतीय श्रेणी अथवा पूरक आने वाले छात्रों की संख्या न्यूनतम रहे।
कमजोर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मेंटरशिप की अनूठी पहल शुरू की है। स्कूलों में कमजोर विद्यार्थियों के समूह बनाकर प्रत्येक समूह के लिए एक शिक्षक को मेंटर नियुक्त किया जाएगा। साथ ही पियर ग्रुप लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें मेधावी और कमजोर विद्यार्थी मिलकर अध्ययन करेंगे। कक्षा पहली से ही हैंडराइटिंग सुधार और त्रुटि सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
रटने की बजाय समझ पर आधारित पढ़ाई के लिए ब्लूप्रिंट और प्रश्न बैंक की सहायता ली जाएगी। शिक्षकों को ब्लूप्रिंट समझाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को प्रत्येक अध्याय का महत्व स्पष्ट हो सके। जिला स्तर पर विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रश्न बैंक तैयार किया जाएगा और फरवरी माह में मेधावी विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल बेहतर परिणाम दिखाने की होड़ में स्तरहीन मूल्यांकन स्वीकार नहीं किया जाएगा। फरवरी तक स्कूलों की सघन मॉनिटरिंग की जाएगी और प्राचार्यों से कार्ययोजना के पालन की रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि जिले के परीक्षा परिणामों में वास्तविक और स्थायी गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।