शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा व विकसित भारत–2047’ पर मंथन
जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शनिवार को भारतीय ज्ञान परंपरा और विकसित भारत–2047 विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रख्यात शिक्षाविदों ने भारतीय शिक्षा, संस्कृति और विकास की दिशा पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लाल बहादुर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. आर.पी. पाठक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि संवेदनशील, संस्कारयुक्त और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे दैनिक जीवन, सोच और व्यवहार में निहित है, जरूरत है उसे वैज्ञानिक और प्रमाणिक रूप से समझने और वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की।
प्रो. पाठक ने कहा कि एनईपी 2020 के माध्यम से देश में स्वदेशी सोच, राष्ट्रीय चेतना और भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूती मिलेगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को विकास के रास्ते पर चलते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों और जनजातीय विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। भारतीय ज्ञान की खोई हुई ऊर्जा को पुनः जागृत करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा विकास गति बनी रही तो भारत वर्ष 2030 तक विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि विकसित भारत–2047 के लक्ष्य को पाने के लिए आत्मनिर्भरता के साथ-साथ तकनीक आधारित औपचारिक अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा रहा है। प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान ही आगे चलकर पश्चिमी देशों में आधुनिक ज्ञान का आधार बना।
विशेष वक्ता शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, कांकेर के प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा कि भारत को जापान की तरह मानव संसाधन को केंद्र में रखकर विकास की रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक आवश्यकताओं का संतुलित स्वरूप है। डॉ. मिश्रा ने मैकाले की शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इसके प्रभाव से हम आज भी पश्चिमी मान्यता पर निर्भर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई पश्चिमी देशों में मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए भारतीय परंपराओं से प्रेरणा ली जा रही है।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, हरियाणा के प्रांत संयोजक डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक, मानसिक और नैतिक विकास को भी समान महत्व दिया जाएगा।
कार्यशाला में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
एनईपी 2020 से बनेगा संस्कार, संस्कृति और स्वावलंबन का भारत