जगदलपुर, 17 जनवरी 2026।
बस्तर के पारंपरिक बेलमेटल (डोकरा) हस्तशिल्प को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए 100 शिल्पकारों को टूलकिट का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम शुक्रवार 16 जनवरी को वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसे बस्तरशिल्प हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर का हस्तशिल्प केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि हजारों कारीगरों की आजीविका का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का उद्देश्य शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आधुनिक तकनीक व सुविधाओं से जोड़ना है, ताकि वे बदलते बाजार की मांगों के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
इस अवसर पर हस्तशिल्प सेवा केन्द्र, जगदलपुर के सहायक निदेशक मनोज राठी ने कहा कि आधुनिक एवं उपयुक्त औजार मिलने से शिल्पकारों की कार्यक्षमता, उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
बस्तरशिल्प हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधि प्रबीर कुमार बनिक ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल टूलकिट वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि शिल्पकारों को संगठित कर प्रशिक्षण देना, बाजार से जोड़ना और उनके उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी कारीगरों के हित में इस प्रकार की योजनाएं निरंतर जारी रहेंगी।
टूलकिट वितरण से बेलमेटल शिल्प से जुड़े कारीगरों को आधुनिक एवं आवश्यक औजार प्राप्त हुए हैं, जिससे उनके कार्य में आसानी होगी, उत्पादन बढ़ेगा और आय में सुधार होगा। यह कार्यक्रम बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प के संरक्षण के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बेलमेटल हस्तशिल्पकारों के साथ संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बस्तर के 100 बेलमेटल शिल्पकारों को मिली नई ताकत, टूलकिट वितरण से आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम