जगदलपुर, 16 जनवरी 2026/
बस्तर जिले में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित समावेशी शिक्षा योजना विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। जिला मुख्यालय जगदलपुर के कुम्हारपारा स्थित ‘सक्षम संस्था’ (जिला संसाधन केंद्र) दिव्यांग बच्चों के लिए न केवल उपचार का केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य को भी नई दिशा दे रही है।
इस केंद्र में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निःशुल्क फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी एवं बौद्धिक विकास से जुड़ी सेवाएं विशेषज्ञों की देखरेख में उपलब्ध कराई जा रही हैं। आधुनिक संसाधनों और संवेदनशील उपचार पद्धतियों के कारण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
केंद्र की सफलता बच्चों के चेहरों पर लौटती मुस्कान में साफ झलकती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है 8 वर्षीय आयुष की, जो सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है। आयुष की माँ बबीता जब पहली बार उसे केंद्र लेकर आई थीं, तब उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। हाथ-पैर अकड़े हुए थे, मांसपेशियाँ कमजोर थीं और वह न गर्दन संभाल पाता था, न ही करवट ले पाता था। रायपुर और विशाखापत्तनम जैसे बड़े शहरों में उपचार के बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
जिला संसाधन केंद्र में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मतिउर रहमान की देखरेख में नियमित थेरेपी शुरू होने के बाद आयुष के जीवन में आशाजनक बदलाव आए। आज वह घुटनों के बल चलने, बैठने और सहारे के साथ खड़े होने का प्रयास करने लगा है।
इसी तरह 3 वर्षीय भूमि, जो सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित है, की कहानी भी केंद्र की प्रभावशीलता को दर्शाती है। भूमि की माँ ममता उसे महज डेढ़ वर्ष की उम्र से यहाँ उपचार के लिए ला रही हैं। पहले भूमि न करवट ले पाती थी, न उठने की कोशिश करती थी और गर्दन में भी पर्याप्त ताकत नहीं थी। नियमित फिजियोथेरेपी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के बाद अब भूमि स्वयं बैठने लगी है, चीजें पकड़ने लगी है और सहारे से खड़ी होने में सक्षम हो रही है।
इन बच्चों में आए सकारात्मक बदलाव उनके अभिभावकों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। उन्होंने जिला संसाधन केंद्र और समग्र शिक्षा अभियान के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इन प्रयासों ने उनके बच्चों को एक नया जीवन और नई उम्मीद दी है।
कुम्हारपारा स्थित यह ‘सक्षम’ केंद्र यह साबित कर रहा है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर प्रयास और संवेदनशील देखभाल से गंभीर दिव्यांगता को भी चुनौती दी जा सकती है और बच्चों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा सकता है।
समग्र शिक्षा की ‘सक्षम’ पहल: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए उम्मीद की नई उड़ान