जगदलपुर, 16 जनवरी 2026/
जिले में कन्या भ्रूण हत्या रोकने और गिरते लिंगानुपात पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में गुरुवार 15 जनवरी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, जगदलपुर में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत पुनर्गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत पंजीयन के लिए प्राप्त नवीन आवेदनों की गहन समीक्षा की गई। समिति के सदस्यों ने डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं से प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की और अधिनियम के कड़े प्रावधानों के अनुरूप उनका मूल्यांकन किया।
समिति ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1994 में लागू पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत गर्भधारण से पूर्व या प्रसव के दौरान लिंग चयन एवं जांच पूर्णतः प्रतिबंधित है। इस कानून का उद्देश्य समाज में बेटियों के अस्तित्व की रक्षा करना और लैंगिक असमानता को समाप्त करना है। बैठक में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
जिला सलाहकार समिति की बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ प्रशासनिक प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी सक्रिय सहभागिता रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक तथा पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. भंवर शर्मा के नेतृत्व में हुई बैठक में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सी. मैत्री एवं आईडीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. वी. के. ठाकुर ने अपने तकनीकी सुझाव प्रस्तुत किए। वहीं, अधिवक्ता प्रीति वानखेडे और समाजसेवी अंजू ने कानूनी व सामाजिक पहलुओं पर अपने विचार रखे।
बैठक में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि कन्या भ्रूण हत्या और लिंग चयन जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कन्या भ्रूण हत्या पर सख्ती, लिंग चयन पर जीरो टॉलरेंस